“फिस्कल डेफिसिट और रेवेन्यू डेफिसिट में मुख्य अंतर व्यय की प्रकृति से जुड़ा है, जहां फिस्कल डेफिसिट कुल व्यय और प्राप्तियों का अंतर दर्शाता है जबकि रेवेन्यू डेफिसिट केवल राजस्व प्राप्तियों और व्यय पर फोकस करता है; 2025-26 में फिस्कल डेफिसिट का लक्ष्य जीडीपी का 4.4% रखा गया है, जो अप्रैल-नवंबर तक 62.3% तक पहुंच चुका है; दोनों घाटे बजट में आर्थिक स्थिरता, कर्ज प्रबंधन और विकास योजनाओं को प्रभावित करते हैं, जिससे टैक्स और सब्सिडी नीतियां बदल सकती हैं।”
फिस्कल डेफिसिट क्या है? फिस्कल डेफिसिट सरकार के कुल व्यय और कुल प्राप्तियों (राजस्व और गैर-राजस्व) के बीच का अंतर होता है, जिसमें उधार शामिल नहीं होते। यह दर्शाता है कि सरकार को अपनी योजनाओं को चलाने के लिए कितना कर्ज लेना पड़ता है। 2025-26 के बजट में फिस्कल डेफिसिट का लक्ष्य 15.7 ट्रिलियन रुपये रखा गया है, जो जीडीपी का 4.4% है। अप्रैल-नवंबर 2025 तक यह 9.77 ट्रिलियन रुपये तक पहुंच चुका है, यानी लक्ष्य का 62.3%। उच्च फिस्कल डेफिसिट से ब्याज दरें बढ़ सकती हैं, क्योंकि सरकार बाजार से अधिक उधार लेती है, जिससे निजी निवेश प्रभावित होता है।
रेवेन्यू डेफिसिट क्या है? रेवेन्यू डेफिसिट केवल राजस्व प्राप्तियों (टैक्स, गैर-टैक्स राजस्व) और राजस्व व्यय (वेतन, सब्सिडी, ब्याज भुगतान) के बीच का अंतर है। यह दिखाता है कि सरकार दैनिक खर्चों के लिए कितना कर्ज ले रही है, जो उत्पादक नहीं माना जाता। 2025-26 के लिए प्रभावी रेवेन्यू डेफिसिट का अनुमान 96,654 करोड़ रुपये है, जो जीडीपी का 0.3% है, जबकि कुल रेवेन्यू डेफिसिट 3.10 लाख करोड़ रुपये के करीब लक्षित है। अप्रैल-जुलाई 2025 तक रेवेन्यू डेफिसिट 5.23 लाख करोड़ रुपये का 28.9% पहुंच चुका है, जो पिछले वर्ष से अधिक है।
दोनों में मुख्य अंतर फिस्कल डेफिसिट व्यापक होता है और इसमें कैपिटल व्यय (इंफ्रास्ट्रक्चर, संपत्ति निर्माण) शामिल होता है, जबकि रेवेन्यू डेफिसिट सिर्फ गैर-उत्पादक व्यय पर केंद्रित है। फिस्कल डेफिसिट को विकास के लिए जरूरी माना जाता है यदि यह इंफ्रा पर खर्च हो, लेकिन रेवेन्यू डेफिसिट अर्थव्यवस्था के लिए बोझ बन सकता है क्योंकि यह उधार को बढ़ाता है बिना संपत्ति बनाए।
| पैरामीटर | फिस्कल डेफिसिट | रेवेन्यू डेफिसिट |
|---|---|---|
| परिभाषा | कुल व्यय – कुल प्राप्तियां (उधार को छोड़कर) | राजस्व व्यय – राजस्व प्राप्तियां |
| शामिल तत्व | राजस्व और कैपिटल दोनों व्यय | केवल राजस्व व्यय (दैनिक खर्च) |
| प्रभाव | कर्ज बढ़ाता है, लेकिन विकास को बढ़ावा दे सकता है | दैनिक खर्चों के लिए कर्ज, स्थिरता को प्रभावित करता है |
| 2025-26 लक्ष्य | 4.4% जीडीपी (15.7 ट्रिलियन रुपये) | 1.0% जीडीपी (3.10 लाख करोड़ रुपये) |
| वर्तमान स्थिति | अप्रैल-नवंबर: 62.3% लक्ष्य | अप्रैल-जुलाई: 28.9% लक्ष्य |
बजट में इनका महत्व क्यों? फिस्कल डेफिसिट का स्तर FRBM एक्ट के तहत सीमित है, जो 2025-26 तक इसे 3% जीडीपी तक लाने का लक्ष्य रखता है, लेकिन वर्तमान में 4.4% पर है। यह घाटा कम करने से सरकार टैक्स राहत दे सकती है या सब्सिडी बढ़ा सकती है, लेकिन अधिक घाटा मुद्रास्फीति को बढ़ाता है। रेवेन्यू डेफिसिट को कम करना प्राथमिकता है क्योंकि यह प्राइमरी डेफिसिट को प्रभावित करता है, जो ब्याज भुगतान को छोड़कर घाटा है—2025-26 में प्राइमरी डेफिसिट 0% के करीब लक्षित है। उच्च रेवेन्यू डेफिसिट से सरकार कैपिटल व्यय घटाती है, जो जीडीपी ग्रोथ को 7.5-7.8% से नीचे ला सकता है।
भारतीय अर्थव्यवस्था पर प्रभाव 2025-26 में फिस्कल डेफिसिट बढ़ने से बॉन्ड यील्ड 7% से ऊपर जा सकती है, जिससे होम लोन महंगे होते हैं। रेवेन्यू डेफिसिट के कारण सब्सिडी जैसे फर्टिलाइजर पर 1.5 लाख करोड़ रुपये का बोझ बढ़ता है, जो टैक्सपेयर्स पर पड़ता है। पिछले वर्ष की तुलना में फिस्कल डेफिसिट 4.8% से घटकर 4.4% लक्षित है, लेकिन कोविड के बाद रिकवरी में रेवेन्यू डेफिसिट 2% से नीचे लाना चुनौती है।
कैसे कम किया जाता है घाटा?
टैक्स सुधार : GST कलेक्शन 2025-26 में 12 लाख करोड़ रुपये से अधिक लक्षित, जो रेवेन्यू डेफिसिट कम करेगा।
व्यय नियंत्रण : वेतन और पेंशन पर 10 लाख करोड़ रुपये सीमित रखना।
डिविडेंड बढ़ाना : PSU से 50,000 करोड़ रुपये अतिरिक्त प्राप्ति।
कैपिटल इनफ्यूजन : इंफ्रा पर 11 लाख करोड़ रुपये खर्च, जो फिस्कल डेफिसिट को उत्पादक बनाता है। अप्रैल-सितंबर 2025 तक फिस्कल डेफिसिट 36.5% लक्ष्य पर था, लेकिन टैक्स रेवेन्यू लक्ष्य से चूकने की आशंका है, जिसे नॉन-टैक्स प्राप्तियों से कवर किया जा रहा है।
आगे की चुनौतियां 2026-27 बजट में फिस्कल डेफिसिट को 4% नीचे लाने की योजना है, लेकिन ग्लोबल स्लोडाउन से एक्सपोर्ट प्रभावित होने पर रेवेन्यू डेफिसिट बढ़ सकता है। भारत का कुल कर्ज जीडीपी का 80% है, जिसमें फिस्कल डेफिसिट का योगदान प्रमुख है। रेवेन्यू डेफिसिट कम करने के लिए डिजिटल टैक्सेशन बढ़ाना जरूरी है, जैसे क्रिप्टो पर 30% टैक्स।
| वर्ष | फिस्कल डेफिसिट (% जीडीपी) | रेवेन्यू डेफिसिट (% जीडीपी) |
|---|---|---|
| 2024-25 (संशोधित) | 4.8% | 1.6% |
| 2025-26 (लक्ष्य) | 4.4% | 1.0% |
| 2026-27 (अनुमान) | 4.0% | 0.5% |
नीतिगत सुझाव सरकार को फिस्कल डेफिसिट के लिए PPP मॉडल अपनाना चाहिए, जैसे हाईवे प्रोजेक्ट्स में, जो उधार कम करेगा। रेवेन्यू डेफिसिट के लिए सब्सिडी टारगेटिंग जरूरी है, जैसे आधार से जुड़ी डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर, जो 2025 में 3 लाख करोड़ रुपये बचाएगी। निवेशकों के लिए, उच्च फिस्कल डेफिसिट बॉन्ड मार्केट में अवसर देता है लेकिन जोखिम बढ़ाता है।
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