‘RAC बर्थ वालों के साथ नहीं हो रहा न्याय’, किराया फुल लेकिन सीट आधी; संसद में उठा मुद्दा, अब मिलेगा रिफंड!

“आरएसी टिकट धारकों से फुल किराया वसूलना लेकिन पूरी बर्थ न देना अनुचित है। संसदीय समिति ने रेल मंत्रालय से आंशिक रिफंड का तंत्र विकसित करने की सिफारिश की है। रिपोर्ट में ट्रेनों की समयबद्धता और सुपरफास्ट मानकों पर भी सवाल उठाए गए हैं।”

आरएसी (Reservation Against Cancellation) सिस्टम भारतीय रेलवे की एक महत्वपूर्ण व्यवस्था है, जो यात्रियों को कंफर्म बर्थ न मिलने पर भी यात्रा करने का अवसर देती है। लेकिन हाल ही में संसद में उठे मुद्दे ने इस सिस्टम की कमियों को उजागर किया है। सार्वजनिक लेखा समिति (PAC) ने अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट कहा कि आरएसी टिकट पर फुल किराया लेना जबकि यात्री को पूरी बर्थ नहीं मिलती, यह न्यायसंगत नहीं है। समिति ने रेल मंत्रालय से मांग की है कि ऐसे यात्रियों के लिए आंशिक रिफंड की व्यवस्था की जाए।

आरएसी टिकट के तहत दो यात्रियों को एक ही बर्थ पर यात्रा करनी पड़ती है, जहां एक यात्री को आधी सीट मिलती है। भारतीय रेलवे के नियमों के अनुसार, चार्ट तैयार होने के बाद भी अगर बर्थ कंफर्म नहीं होती, तो यात्री को उसी स्थिति में यात्रा करनी होती है। लेकिन किराया फुल लिया जाता है, जो सामान्य कंफर्म टिकट के बराबर होता है। उदाहरण के लिए, दिल्ली से मुंबई जाने वाली राजधानी एक्सप्रेस में स्लीपर क्लास का फुल किराया लगभग 1500 रुपये है, लेकिन आरएसी यात्री को सिर्फ आधी सीट पर यात्रा करनी पड़ती है।

संसद में पेश की गई रिपोर्ट ‘ट्रेन ऑपरेशंस में समयबद्धता और यात्रा समय’ शीर्षक वाली है, जिसमें PAC ने रेलवे की कई नीतियों पर सवाल उठाए। समिति के अध्यक्ष ने कहा कि फुल चार्ज लेकर आंशिक सुविधा देना यात्रियों के साथ अन्याय है। रिपोर्ट में उल्लेख किया गया कि लाखों यात्री हर साल आरएसी टिकट पर यात्रा करते हैं, खासकर त्योहारों और पीक सीजन में। अनुमानित आंकड़ों के अनुसार, 2025-26 में भारतीय रेलवे ने करीब 1.5 करोड़ आरएसी टिकट जारी किए, जिनमें से 40% यात्रियों को पूरी बर्थ नहीं मिली।

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समिति ने सिफारिश की कि रेल मंत्रालय एक ऐसा मैकेनिज्म बनाए, जिसमें चार्ट तैयार होने के बाद आरएसी रहने वाले यात्रियों को किराए का एक हिस्सा रिफंड किया जाए। हालांकि रिफंड की राशि पर अभी स्पष्टता नहीं है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि यह 25% से 50% तक हो सकता है। उदाहरणस्वरूप, अगर टिकट का किराया 1000 रुपये है, तो रिफंड 250-500 रुपये तक हो सकता है। यह रिफंड टीटीई (ट्रैवलिंग टिकट एग्जामिनर) द्वारा यात्रा के दौरान या IRCTC ऐप के माध्यम से क्लेम किया जा सकता है।

इस मुद्दे पर रेल मंत्री ने संसद में जवाब देते हुए कहा कि समिति की सिफारिशों पर विचार किया जा रहा है। रेलवे बोर्ड के अधिकारियों ने संकेत दिया कि नई पॉलिसी जल्द लागू की जा सकती है, जिसमें ऑटोमेटिक रिफंड सिस्टम शामिल होगा। वर्तमान में, आरएसी टिकट पर कोई रिफंड नहीं मिलता अगर टिकट कैंसल नहीं किया जाता। लेकिन नई व्यवस्था से यात्रियों को राहत मिलेगी, खासकर लंबी दूरी की यात्राओं में जहां आराम की जरूरत ज्यादा होती है।

आरएसी सिस्टम की चुनौतियां कई हैं। एक ओर यह वेटिंग लिस्ट वाले यात्रियों को यात्रा का मौका देता है, लेकिन दूसरी ओर सुविधा की कमी से शिकायतें बढ़ती हैं। रिपोर्ट में उल्लेखित है कि रेलवे की समयबद्धता में सुधार से आरएसी की संख्या कम हो सकती है। वर्तमान में, भारतीय रेलवे की औसत समयबद्धता 75% है, जो सुपरफास्ट ट्रेनों के लिए 80% से कम है। समिति ने सुपरफास्ट ट्रेनों के मानकों की समीक्षा की भी मांग की, क्योंकि कई ट्रेनें 55 किमी/घंटा की औसत स्पीड पर चलती हैं लेकिन सुपरफास्ट चार्ज वसूलती हैं।

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यात्रियों की प्रतिक्रियाएं भी इस मुद्दे पर मजबूत हैं। सोशल मीडिया पर कई यूजर्स ने शेयर किया कि वे फुल किराया देकर भी असुविधा झेलते हैं। एक यात्री ने बताया कि दिल्ली से चेन्नई की यात्रा में आरएसी पर 24 घंटे आधी सीट पर बैठना पड़ा, जबकि किराया 2000 रुपये से ज्यादा था। अब संसदीय समिति की सिफारिश से उम्मीद है कि रेलवे इस पर कार्रवाई करेगा।

आरएसी vs कंफर्म टिकट: तुलना

पैरामीटरआरएसी टिकटकंफर्म टिकट
किरायाफुल (कोई छूट नहीं)फुल
सुविधाआधी बर्थ (दो यात्रियों के बीच शेयर)पूरी बर्थ
रिफंड (वर्तमान)कोई नहीं (अगर यात्रा की जाती है)लागू नहीं
प्रस्तावित बदलावआंशिक रिफंड (25-50%)कोई बदलाव नहीं
प्रभावित यात्रीलाखों प्रति वर्षसभी कंफर्म
मुख्य समस्याअन्यायपूर्ण चार्जउपलब्धता

इस तालिका से स्पष्ट है कि आरएसी यात्रियों को सुविधा के अनुपात में किराया नहीं मिलता। समिति ने सुझाव दिया कि रेलवे डिजिटल सिस्टम से आरएसी को ट्रैक कर रिफंड प्रोसेस को आसान बनाए।

मुख्य बिंदु: संसदीय समिति की सिफारिशें

फुल किराया लेकर आंशिक बर्थ देना अनुचित।

रेल मंत्रालय आंशिक रिफंड का मैकेनिज्म बनाए।

सुपरफास्ट ट्रेनों के स्पीड मानकों की समीक्षा।

ट्रेनों की समयबद्धता में सुधार से आरएसी कम होगी।

यात्रियों से फीडबैक लेकर पॉलिसी अपडेट।

रेलवे के अधिकारियों का कहना है कि नई वंदे भारत और अमृत भारत ट्रेनों से बर्थ उपलब्धता बढ़ेगी, लेकिन आरएसी जैसी व्यवस्था अभी जारी रहेगी। विशेषज्ञों के अनुसार, अगर रिफंड पॉलिसी लागू होती है, तो यह यात्रियों के अधिकारों को मजबूत करेगी। उदाहरण के लिए, एयरलाइंस में सीट न मिलने पर रिफंड मिलता है, इसी तरह रेलवे में भी यह जरूरी है।

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इस मुद्दे का प्रभाव बड़े पैमाने पर है। उत्तर भारत से दक्षिण भारत जाने वाली ट्रेनों में आरएसी सबसे ज्यादा होती है। रिपोर्ट में उल्लेखित आंकड़ों से पता चलता कि 2025 में त्योहार सीजन में 30% टिकट आरएसी पर जारी हुए। अब रिफंड की संभावना से यात्रियों में उत्साह है, लेकिन लागू होने तक इंतजार करना होगा। रेलवे ने संकेत दिया कि पायलट प्रोजेक्ट कुछ रूट्स पर शुरू किया जा सकता है, जैसे दिल्ली-मुंबई या दिल्ली-कोलकाता।

आरएसी यात्रियों के लिए टिप्स

टिकट बुकिंग के समय प्रीमियम तत्काल चुनें अगर संभव हो।

चार्ट तैयार होने के बाद टीटीई से बर्थ अपग्रेडेशन की मांग करें।

IRCTC ऐप से स्टेटस ट्रैक करें।

अगर रिफंड पॉलिसी लागू हो, तो क्लेम फॉर्म भरें।

वैकल्पिक रूट्स या ट्रेनें चुनें जहां आरएसी कम हो।

यह बदलाव भारतीय रेलवे की छवि को बेहतर बनाएगा, क्योंकि यात्रियों की शिकायतें कम होंगी। समिति ने रेल मंत्रालय से अपडेट मांगा है कि इस पर क्या कदम उठाए जा रहे हैं।

Disclaimer: यह न्यूज रिपोर्ट और सूत्रों से प्राप्त टिप्स पर आधारित है।

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