अमेरिका-इजराइल के हमलों के बाद ईरान ने हॉर्मुज जलडमरूमध्य को व्यावहारिक रूप से बंद कर दिया है। जहाजों का ट्रैफिक 70% तक गिरा, वैश्विक तेल आपूर्ति का 20% प्रभावित। भारत के 50% क्रूड आयात पर खतरा, पेट्रोल-डीजल में तेज उछाल और महंगाई का दबाव संभव। शेयर बाजार में अस्थिरता बढ़ी, लेकिन लंबे समय तक बंद नहीं रहने की उम्मीद।
हॉर्मुज जलडमरूमध्य, जो सिर्फ 21 मील चौड़ा है, फारस की खाड़ी को खुली समुद्र से जोड़ता है। यह दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा चोकपॉइंट है। हाल के अमेरिका और इजराइल के ईरान पर सैन्य हमलों के जवाब में ईरान की रिवॉल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) ने जहाजों को चेतावनी दी कि जलडमरूमध्य से गुजरना सुरक्षित नहीं है। IRGC ने VHF चैनल पर ब्रॉडकास्ट किया कि “कोई जहाज हॉर्मुज से नहीं गुजर सकता”। ईरानी मीडिया ने इसे “व्यावहारिक रूप से बंद” घोषित किया।
जहाज ट्रै킹 डेटा से पता चलता है कि क्षेत्र में कमर्शियल ट्रैफिक 70% तक गिर गया है। कई टैंकरों ने यू-टर्न लिया या रुक गए। जापानी शिपिंग कंपनियां जैसे Nippon Yusen और Mitsui O.S.K. Lines ने हॉर्मुज से ऑपरेशंस रोक दिए। Hapag-Lloyd जैसी कंटेनर लाइनों ने भी ट्रांजिट सस्पेंड कर दिया। हालांकि अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि कोई फुल मिलिट्री ब्लॉकेड नहीं है, लेकिन खतरे की वजह से जहाज बचकर जा रहे हैं।
यह जलडमरूमध्य रोजाना औसतन 20 मिलियन बैरल तेल और पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स की ढुलाई करता है, जो वैश्विक तेल खपत का करीब 20% है। इसमें कच्चा तेल, कंडेंसेट और रिफाइंड प्रोडक्ट्स शामिल हैं। साथ ही वैश्विक LNG का बड़ा हिस्सा, मुख्य रूप से कतर से, इसी रास्ते से जाता है। एशिया को 80% से ज्यादा तेल इसी रास्ते मिलता है, जिसमें चीन, भारत, जापान और दक्षिण कोरिया प्रमुख हैं।
भारत के लिए यह संकट गंभीर है। भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल आयातक है और अपनी जरूरत का 85-90% तेल आयात करता है। हाल के महीनों में (जनवरी-फरवरी 2026) भारत के कुल क्रूड आयात का लगभग 50% यानी 2.5-2.7 मिलियन बैरल प्रतिदिन हॉर्मुज से गुजरता है। यह इराक, सऊदी अरब, UAE और कुवैत से आने वाला तेल है। पहले यह हिस्सा 40% था, लेकिन रूसी तेल से दूरी बनाने के बाद मिडिल ईस्ट पर निर्भरता बढ़ी। LNG आयात का भी 50-60% इसी रास्ते से आता है, मुख्य रूप से कतर और UAE से।
यदि बंदी लंबी चली तो भारत पर असर:
तेल की कीमतें — वैश्विक क्रूड में $10 प्रति बैरल बढ़ोतरी से भारत का आयात बिल सालाना ₹10,000-15,000 करोड़ बढ़ सकता है। पेट्रोल-डीजल में ₹5-10 प्रति लीटर तक उछाल संभव। महंगाई पर दबाव बढ़ेगा, क्योंकि ट्रांसपोर्ट और उत्पादन लागत बढ़ेगी।
शेयर बाजार — ऑयल मार्केटिंग कंपनियां (IOC, BPCL, HPCL) प्रभावित होंगी। हाई ऑयल प्राइस से फ्यूल सब्सिडी बढ़ सकती है, फिस्कल डेफिसिट पर असर। बैंकिंग और ऑटो सेक्टर में गिरावट, क्योंकि कंज्यूमर स्पेंडिंग घटेगी। सेंसेक्स-निफ्टी में 2-5% तक अस्थिरता संभव।
महंगाई और अर्थव्यवस्था — आयात बिल बढ़ने से करेंट अकाउंट डेफिसिट चौड़ा होगा, रुपया कमजोर होगा। फूड और ट्रांसपोर्ट महंगा होने से आम आदमी पर बोझ।
अच्छी खबर यह है कि भारत के पास पर्याप्त स्टॉक हैं। क्रूड इन्वेंटरी कम से कम 10 दिनों और फ्यूल स्टॉक 5-7 दिनों की जरूरत पूरी कर सकते हैं। यदि बंदी लंबी हुई तो रूस से आयात बढ़ाकर बैलेंस किया जा सकता है। सऊदी और UAE के पास कुछ बाइपास पाइपलाइंस हैं (करीब 2.6 मिलियन बैरल प्रतिदिन), लेकिन यह कुल ट्रैफिक का सिर्फ 12-17% है।
ईरान ने पहले भी कई बार बंद करने की धमकी दी, लेकिन कभी फुल ब्लॉकेड नहीं किया। विशेषज्ञों का मानना है कि लंबे समय तक बंद रखना मुश्किल है, क्योंकि अमेरिकी नेवी और गठबंधन फोर्सेस मौजूद हैं। फिलहाल बाजार में वोलेटिलिटी है, लेकिन पूर्ण बंदी की बजाय खतरे से जहाज बच रहे हैं।
Disclaimer: यह खबर वर्तमान घटनाक्रम और उपलब्ध आंकड़ों पर आधारित है। बाजार और भू-राजनीतिक स्थिति तेजी से बदल सकती है। निवेश या निर्णय लेने से पहले विशेषज्ञ सलाह लें।