“MMTC-PAMP, MMTC की सहयोगी कंपनी, गोल्ड रीसाइक्लिंग के सफल मॉडल के बाद अब चांदी पर बड़ा निवेश कर रही है। पायलट प्रोजेक्ट दिल्ली से शुरू होगा, जहां मौजूदा स्टोर्स को अपग्रेड कर घरेलू चांदी को रीसाइक्ल किया जाएगा। इससे बढ़ती इंडस्ट्रियल और इनवेस्टमेंट डिमांड को पूरा करने में मदद मिलेगी, जबकि सप्लाई की कमी को कम किया जाएगा। कंपनी स्टोर्स की संख्या दोगुनी करने और डिजिटल सेल्स बढ़ाने की योजना बना रही है।”
MMTC-PAMP, जो MMTC की एक प्रमुख सहयोगी कंपनी है, ने गोल्ड रीसाइक्लिंग के क्षेत्र में अपनी मजबूत स्थिति के बाद अब चांदी पर फोकस शिफ्ट किया है। कंपनी चांदी की बढ़ती मांग को देखते हुए रीसाइक्लिंग के माध्यम से घरेलू संसाधनों का उपयोग करने की रणनीति अपनाने जा रही है। यह कदम न केवल सप्लाई चेन को मजबूत करेगा, बल्कि आयात पर निर्भरता को भी कम करेगा।
योजना की मुख्य विशेषताएं
MMTC-PAMP की यह पहल पायलट आधार पर शुरू की जा रही है, जिसमें मौजूदा गोल्ड रीसाइक्लिंग इंफ्रास्ट्रक्चर का उपयोग किया जाएगा। कंपनी के पास वर्तमान में 20 स्टोर्स हैं, जो LBMA-मान्यता प्राप्त रिफाइनरी से जुड़े हैं। इन स्टोर्स को चांदी हैंडलिंग के लिए अपग्रेड किया जाएगा, जिसमें इक्विपमेंट कैलिब्रेशन और स्टाफ ट्रेनिंग शामिल है। पायलट दिल्ली से शुरू होगा, जहां कुछ चुनिंदा स्टोर्स में चांदी की कलेक्शन और प्रोसेसिंग की सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी।
इस योजना के तहत घरेलू स्तर पर उपलब्ध चांदी, जैसे पुराने ज्वेलरी, उतेंसिल्स या इंडस्ट्रियल वेस्ट को इकट्ठा किया जाएगा। भारतीय घरों में अनुमानित 250,000 टन चांदी का स्टॉक मौजूद है, जो गोल्ड के मुकाबले 10 गुना अधिक है। रीसाइक्लिंग प्रक्रिया में चांदी को शुद्ध कर मार्केट में वापस लाया जाएगा, जो इंडस्ट्रियल यूज जैसे सोलर पैनल्स, इलेक्ट्रॉनिक्स और ऑटोमोटिव सेक्टर की जरूरतों को पूरा करेगा।
बाजार की वर्तमान स्थिति और चुनौतियां
चांदी की वैश्विक मांग में तेजी आई है, जबकि माइन प्रोडक्शन में कोई बड़ा विस्तार नहीं हो रहा। भारत में चांदी का आयात 2025 में 9 बिलियन डॉलर से अधिक पहुंच गया, जो 2024 के मुकाबले 4% अधिक है। कीमतों में भी उछाल देखा गया है, जहां लोकल बुलियन मार्केट में चांदी 334,300 रुपये प्रति किलोग्राम के पीक पर पहुंच चुकी है। पिछले 12 महीनों में चांदी ने गोल्ड के मुकाबले दोगुना रिटर्न दिया है, जिससे यह “नया गोल्ड” के रूप में उभर रही है।
इंडस्ट्रियल डिमांड चांदी की कुल खपत का बड़ा हिस्सा है, जबकि गोल्ड मुख्य रूप से इनवेस्टमेंट और ज्वेलरी के लिए इस्तेमाल होता है। सप्लाई की कमी से कीमतों में अस्थिरता बढ़ रही है, जो अर्थव्यवस्था पर असर डाल सकती है। MMTC-PAMP की योजना इसी गैप को भरने की दिशा में है, जहां रीसाइक्लिंग से घरेलू सप्लाई चेन को मजबूत किया जाएगा।
रीसाइक्लिंग प्रक्रिया का विस्तृत विवरण
रीसाइक्लिंग की प्रक्रिया कई चरणों में विभाजित है:
| वर्ष | चांदी आयात (टन में) | कीमत वृद्धि (%) | मुख्य डिमांड सेक्टर |
|---|---|---|---|
| 2024 | 50 | 75 | सोलर पैनल्स (40%), इलेक्ट्रॉनिक्स (30%) |
| 2025 | 60 | 130 | ऑटोमोटिव (25%), ज्वेलरी (20%) |
| अनुमानित 2026 | 70 | 140 | इंडस्ट्रियल (50%), इनवेस्टमेंट (25%) |
कलेक्शन : ग्राहक स्टोर्स पर पुरानी चांदी जमा करेंगे, जहां एसेयिंग सेंटर में इसकी शुद्धता जांच की जाएगी।
प्रोसेसिंग : LBMA-मानकों के अनुसार रिफाइनिंग होगी, जिसमें माइनर टेक्नोलॉजी अपग्रेड्स शामिल हैं।
डिस्ट्रीब्यूशन : शुद्ध चांदी को बार, कॉइन्स या डिजिटल फॉर्म में बेचा जाएगा। कंपनी अपनी मिंटिंग कैपेसिटी को 2.4 मिलियन से बढ़ाकर 3.6 मिलियन कॉइन्स करने की योजना बना रही है।
सुरक्षा उपाय : सभी ट्रांजेक्शन्स ट्रेसेबल होंगे, ताकि फ्रॉड से बचा जा सके।
यह प्रक्रिया गोल्ड रीसाइक्लिंग से मिलती-जुलती है, लेकिन चांदी की इंडस्ट्रियल प्रॉपर्टीज को ध्यान में रखते हुए एडजस्टमेंट्स किए गए हैं। उदाहरण के लिए, चांदी की उच्च कंडक्टिविटी के कारण इसे इलेक्ट्रॉनिक वेस्ट से निकालना अधिक लाभदायक है।
अपेक्षित प्रभाव और विस्तार योजनाएं
इस पहल से सप्लाई की कमी को 20-30% तक कम किया जा सकता है, खासकर जब वैश्विक माइनिंग में कोई बड़ा बदलाव नहीं दिख रहा। कंपनी अगले 5 वर्षों में स्टोर्स की संख्या दोगुनी करने का लक्ष्य रखती है, जो पूरे देश में फैलेगी। डिजिटल कॉमर्स को बढ़ावा देने के लिए वेबसाइट, Amazon और Flipkart जैसे प्लेटफॉर्म्स पर सेल्स बढ़ाई जाएगी, जहां डिजिटल सिल्वर की पेशकश पहले से उपलब्ध है।
ब्रॉडर स्तर पर, यह योजना क्रिटिकल मिनरल्स की रीसाइक्लिंग को बढ़ावा देगी, जिसमें बैटरी और इलेक्ट्रॉनिक वेस्ट से मिनरल्स निकालना शामिल है। सरकारी स्तर पर 15 बिलियन रुपये का इंसेंटिव प्रोग्राम भी इस दिशा में सहायक है, जो आयात निर्भरता को घटाकर 270 किलोटन रीसाइक्लिंग कैपेसिटी का लक्ष्य रखता है।
प्रमुख लाभ और रिस्क मैनेजमेंट
लाभ : घरेलू संसाधनों का उपयोग से आयात बिल कम होगा, पर्यावरण संरक्षण में योगदान (माइनिंग की बजाय रीसाइक्लिंग कम कार्बन फुटप्रिंट छोड़ती है), और इनवेस्टर्स के लिए सस्ता एंट्री पॉइंट।
रिस्क : मार्केट वोलेटिलिटी से निपटने के लिए कंपनी हेजिंग स्ट्रैटजी अपनाएगी, जबकि क्वालिटी कंट्रोल के लिए सख्त एसेयिंग प्रोटोकॉल लागू होंगे।
इंडस्ट्री इंपैक्ट : अन्य रिफाइनर्स को भी रीसाइक्लिंग अपनाने के लिए प्रेरित करेगा, जिससे सेकंडरी सप्लाई चेन विकसित होगी।
GSI जैसी संस्थाओं की एक्सप्लोरेशन योजनाएं भी चांदी जैसे क्रिटिकल मिनरल्स पर फोकस कर रही हैं, जो इस पहल को सपोर्ट करेंगी। कुल मिलाकर, MMTC-PAMP की यह रणनीति चांदी मार्केट को ट्रांसफॉर्म करने की क्षमता रखती है, जहां इंडस्ट्रियल ग्रोथ और ग्रीन ट्रांजिशन की जरूरतें पूरी होंगी।
Disclaimer: यह खबर विभिन्न रिपोर्ट्स, टिप्स और स्रोतों पर आधारित है।