अमेरिका में दोतरफा घिरे गौतम अदाणी: SEC के रिश्वत आरोपों के बाद अब OFAC जांच ने बढ़ाई मुश्किलें, शेयरों में भारी गिरावट!

“गौतम अदाणी अमेरिकी जांच के दो मोर्चों पर फंसे हुए हैं। नवंबर 2024 में US SEC ने रिश्वत और फ्रॉड के आरोप लगाते हुए सिविल केस दायर किया था, जबकि अब फरवरी 2026 में OFAC की जांच ने नए सिरे से बाजार को हिलाया। Adani Enterprises के शेयर 3.5% तक टूटे, निवेशकों में चिंता बढ़ी। अदाणी ग्रुप ने आरोपों को बेबुनियाद बताया और सहयोग का दावा किया है।”

अमेरिका में दोतरफा घिरे गौतम अदाणी, US SEC के बाद अब इस आरोप ने उड़ाई नींद; धड़ाम हुए शेयर!

अदाणी ग्रुप के चेयरमैन गौतम अदाणी इन दिनों अमेरिकी जांच एजेंसियों के सख्त घेरे में हैं। एक तरफ US Securities and Exchange Commission (SEC) का लंबित सिविल फ्रॉड केस, जिसमें रिश्वत साजिश और अमेरिकी निवेशकों को गुमराह करने के गंभीर आरोप हैं, वहीं दूसरी ओर US Treasury की Office of Foreign Assets Control (OFAC) की नई जांच ने स्थिति को और जटिल बना दिया है।

नवंबर 2024 में SEC ने गौतम अदाणी और उनके भतीजे सागर अदाणी पर आरोप लगाया था कि उन्होंने Adani Green Energy Ltd के जरिए सोलर प्रोजेक्ट्स के लिए भारतीय अधिकारियों को सैकड़ों मिलियन डॉलर की रिश्वत देने की योजना बनाई। इस दौरान Adani Green ने 750 मिलियन डॉलर का बॉन्ड इश्यू किया, जिसमें से करीब 175 मिलियन डॉलर अमेरिकी निवेशकों से जुटाए गए। आरोप है कि ऑफरिंग डॉक्यूमेंट्स में एंटी-ब्राइबरी पॉलिसी के बारे में गलत बयान दिए गए, जबकि बैकग्राउंड में रिश्वत की डील चल रही थी। यह साजिश भारतीय राज्य सरकारों से ऊंची दरों पर बिजली खरीद के समझौते हासिल करने के लिए थी, जिससे Adani Green को अरबों डॉलर का फायदा होने वाला था।

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SEC के अलावा US Department of Justice (DOJ) ने भी समानांतर क्रिमिनल इंडिक्टमेंट जारी किया, जिसमें गौतम अदाणी, सागर अदाणी समेत कई एग्जीक्यूटिव्स पर वायर फ्रॉड, सिक्योरिटीज फ्रॉड और रिश्वत के 5 काउंट्स लगाए गए। कुल रिश्वत राशि 250-265 मिलियन डॉलर बताई गई।

जनवरी 2026 में मामला आगे बढ़ा जब अदाणी पक्ष ने अमेरिकी कोर्ट में SEC के नोटिस को स्वीकार करने पर सहमति जताई। गौतम अदाणी ने टॉप वॉल स्ट्रीट लॉ फर्म Sullivan & Cromwell LLP के Robert Giuffra Jr. को हायर किया, जो पूर्व में Donald Trump और Volkswagen जैसे बड़े क्लाइंट्स का बचाव कर चुके हैं। यह कदम केस को स्टॉल से निकालने के लिए था, क्योंकि 14 महीने से अधिक समय तक सर्विस ऑफ समन में अड़चन थी। अब अदाणी को 90 दिनों के अंदर जवाब दाखिल करना होगा, जिसमें मोशन टू डिसमिस या डिफेंस शामिल हो सकता है।

ताजा मोर्चा OFAC जांच का है। फरवरी 2026 में Adani Enterprises ने एक्सचेंज फाइलिंग में बताया कि US Treasury की OFAC से 4 फरवरी को Request for Information मिला। यह Wall Street Journal की जून 2025 की रिपोर्ट से जुड़ा है, जिसमें दावा किया गया कि अदाणी ग्रुप से जुड़ी कंपनियों ने Mundra Port के जरिए ईरानी ओरिजिन LPG का आयात किया, जो US सैंक्शंस को चकमा देने का तरीका हो सकता है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि गौतम अदाणी Trump प्रशासन से रिश्वत आरोपों को ड्रॉप करवाने की कोशिश कर रहे थे।

Adani Enterprises ने स्पष्ट किया कि जांच सिविल है, कोई उल्लंघन या नॉन-कंप्लायंस का निष्कर्ष नहीं निकला। कंपनी ने voluntarily चर्चा शुरू की और पूरी तरह सहयोग कर रही है। साथ ही जून 2025 से सभी LPG इंपोर्ट्स बंद कर दिए हैं। हालांकि इस खबर से Adani Enterprises के शेयर 3.5% तक गिरे, जबकि अन्य ग्रुप शेयर्स में भी 2-5% की गिरावट देखी गई।

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प्रमुख प्रभाव और बाजार प्रतिक्रिया

शेयर प्राइस इंपैक्ट : Adani Enterprises का शेयर हाल के दिनों में 1800 के स्तर से लुढ़ककर 1710 तक पहुंचा। Adani Green, Adani Ports समेत अन्य शेयर्स में भी दबाव।

कानूनी स्थिति : SEC केस सिविल है, जिसमें पेनल्टी और इंजंक्शन संभव। DOJ का क्रिमिनल केस अलग चल रहा है।

ग्रुप का रुख : अदाणी ग्रुप ने सभी आरोपों को “बेबुनियाद” बताया और “सभी कानूनी रास्तों” से बचाव का वादा किया। कंपनी ने कहा कि जांच में कोई नया आरोप नहीं, सिर्फ जानकारी मांगी गई है।

भारतीय बाजार पर असर : भारतीय निवेशक US जांचों को लेकर सतर्क हैं, लेकिन ग्रुप की इंफ्रा और एनर्जी प्रोजेक्ट्स मजबूत बने हुए हैं।

यह जांचें अदाणी ग्रुप की अंतरराष्ट्रीय छवि और फंडिंग पर लंबे समय तक असर डाल सकती हैं। निवेशकों को सलाह है कि बाजार की अस्थिरता को देखते हुए सतर्क रहें और लेटेस्ट अपडेट्स पर नजर रखें।

Disclaimer: यह लेख उपलब्ध सार्वजनिक जानकारी पर आधारित है और निवेश सलाह नहीं है। बाजार जोखिमों के अधीन है।

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