बजट 2026 में आयकर सुधारों की उम्मीदें मजबूत हैं, जहां ITR फाइलिंग की डेडलाइन फिक्स करने और रिफंड प्रोसेसिंग को तेज बनाने पर फोकस है। विशेषज्ञों का मानना है कि 31 जुलाई की डेडलाइन को 31 अगस्त तक शिफ्ट करने से अनुपालन बढ़ेगा, जबकि रियल-टाइम ट्रैकिंग डैशबोर्ड से रिफंड में देरी कम होगी। AY 2025-26 में 8.80 करोड़ रिटर्न फाइल हुए, लेकिन 55 लाख अभी प्रोसेसिंग में अटके हैं, जिससे टैक्सपेयर्स को परेशानी हो रही है।
आयकर विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, AY 2025-26 के लिए 8.80 करोड़ ITR फाइल हो चुके हैं, जिनमें से 8.66 करोड़ वेरीफाई हो गए हैं, लेकिन 8.02 करोड़ ही प्रोसेस हो पाए हैं। बाकी 55 लाख रिटर्न अभी भी प्रोसेसिंग स्टेज पर अटके हैं, जिसकी वजह से रिफंड में औसतन हफ्तों की देरी हो रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि डेटा वेरीफिकेशन, डिस्क्रेपेंसी नोटिस और बड़े रिफंड वाले मामलों में अतिरिक्त स्क्रूटिनी इस देरी की मुख्य वजह है।
बजट 2026 में इन मुद्दों को दूर करने के लिए कई प्रस्ताव चर्चा में हैं। टैक्स कंसल्टेंट्स जैसे Deloitte India ने रियल-टाइम रिफंड ट्रैकिंग डैशबोर्ड की सिफारिश की है, जो टैक्सपेयर्स को उनके रिफंड स्टेटस की लाइव अपडेट देगा। इससे न सिर्फ पारदर्शिता बढ़ेगी, बल्कि अनावश्यक देरी भी कम होगी। साथ ही, ITR फाइलिंग की डेडलाइन को हर साल एक्सटेंड करने की प्रथा पर रोक लगाने की मांग है।
मुख्य उम्मीदें और सुधार सुझाव
फिक्स्ड ITR डेडलाइन: 31 जुलाई की जगह 31 अगस्त को परमानेंट ड्यू डेट बनाने से टैक्सपेयर्स को ज्यादा समय मिलेगा, जिससे लास्ट-मिनट स्ट्रेस कम होगा और अनुपालन रेट 10-15% बढ़ सकता है।
फास्टर रिफंड प्रोसेसिंग: नई Income-tax Act, 2025 के तहत अप्रैल 2026 से लागू होने वाले बदलावों में ऑटोमेटेड चेक शामिल हो सकते हैं, जो रिफंड को 30 दिनों के अंदर क्रेडिट करने का लक्ष्य रखेंगे।
डिस्क्रेपेंसी नोटिस में सुधार: बजट में ‘नज’ इनिशिएटिव को मजबूत बनाने का प्रस्ताव है, जहां डिस्क्रेपेंसी मिलने पर टैक्सपेयर्स को 15 दिनों का समय दिया जाएगा, लेकिन प्रोसेसिंग को रोका नहीं जाएगा।
कॉम्प्लेक्स केसेज के लिए स्पेशल विंडो: विदेशी आय या बड़े क्लेम वाले रिटर्न के लिए अलग से फास्ट-ट्रैक सिस्टम लाने की उम्मीद है, जिससे कुल प्रोसेसिंग टाइम 50% कम हो सकता है।
कॉम्पाउंडिंग गाइडलाइंस में रिलैक्सेशन: टेक्निकल डिफॉल्ट्स के लिए कंपाउंडिंग चार्जेज को 15-30% से घटाकर 5-10% करने का सुझाव है, जो ईमानदार टैक्सपेयर्स को राहत देगा।
वर्तमान ITR डेडलाइンズ vs अपेक्षित बदलाव
| पैरामीटर | वर्तमान स्थिति (AY 2026-27) | बजट 2026 में अपेक्षित सुधार |
|---|---|---|
| नॉन-ऑडिट टैक्सपेयर्स के लिए ITR ड्यू डेट | 31 जुलाई | 31 अगस्त (फिक्स्ड, बिना एक्सटेंशन) |
| बिलेटेड रिटर्न ड्यू डेट | 31 दिसंबर | कोई बदलाव नहीं, लेकिन पेनल्टी में रिलैक्सेशन |
| रिफंड प्रोसेसिंग टाइम | 9 महीने तक (डिस्क्रेपेंसी पर रुकावट) | 30-45 दिनों में क्रेडिट, रियल-टाइम ट्रैकिंग |
| अपडेटेड रिटर्न ड्यू डेट | मूल असेसमेंट ईयर के 4 साल बाद | सरलीकृत प्रक्रिया, कम स्क्रूटिनी |
| पेनल्टी फीस (लेट फाइलिंग) | Rs. 5,000 तक | Rs. 1,000 तक घटाने का सुझाव |
ये सुधार न सिर्फ टैक्स सिस्टम को यूजर-फ्रेंडली बनाएंगे, बल्कि अनुपालन को बढ़ावा देंगे। विशेषज्ञों के अनुसार, अगर ये बदलाव लागू हुए, तो अगले फाइनेंशियल ईयर में ITR फाइलिंग की संख्या 10 करोड़ पार कर सकती है। साथ ही, रिफंड में देरी से जुड़े शिकायतें 40% तक कम हो सकती हैं।
Disclaimer: यह रिपोर्ट समाचारों, विशेषज्ञ राय और उपलब्ध आंकड़ों पर आधारित है। कर संबंधी निर्णय लेने से पहले पेशेवर सलाह लें।