“ओपनएआई के सीईओ सैम ऑल्टमैन ने चैटजीपीटी में वेरिफाइड एडल्ट यूजर्स के लिए एरोटिका और सेक्सुअल थीम वाली टेक्स्ट चैट्स की अनुमति देने की योजना बनाई है, जिसे कंपनी ‘स्मट’ कह रही है न कि पोर्नोग्राफी। लेकिन इस फैसले पर कंपनी के सलाहकारों और एडवाइजरी काउंसिल में भारी विरोध हुआ है, जहां मनोविज्ञान और न्यूरोसाइंस विशेषज्ञों ने भावनात्मक निर्भरता, मानसिक स्वास्थ्य जोखिम और नाबालिगों की पहुंच की आशंका जताई है। लॉन्च पहले 2026 की पहली तिमाही में प्रस्तावित था, लेकिन अब इसे टाल दिया गया है ताकि अन्य प्राथमिकताओं पर फोकस किया जा सके।”
सैम ऑल्टमैन की नई योजना पर कंपनी में बवाल
ओपनएआई के सीईओ सैम ऑल्टमैन ने पिछले साल अक्टूबर में घोषणा की थी कि कंपनी अब “एडल्ट यूजर्स को एडल्ट की तरह ट्रीट” करेगी। उन्होंने एक्स पर पोस्ट किया कि मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े गंभीर मुद्दों को अब काफी हद तक कंट्रोल कर लिया गया है और नए टूल्स की मदद से रेस्ट्रिक्शन्स को सुरक्षित तरीके से रिलैक्स किया जा सकता है। दिसंबर से एज-गेटिंग सिस्टम को पूरी तरह रोलआउट करते हुए वेरिफाइड एडल्ट यूजर्स के लिए एरोटिका जैसा कंटेंट अनुमति देने की बात कही गई।
यह योजना चैटजीपीटी के लिए ‘एडल्ट मोड’ के रूप में सामने आई, जिसमें यूजर्स टेक्स्ट बेस्ड सेक्सुअल या एरोटिक कन्वर्सेशन कर सकेंगे। कंपनी का कहना है कि यह “स्मट” कैटेगरी में आएगा, न कि पोर्नोग्राफी। लॉन्च पर इमेज, वॉइस या वीडियो जनरेशन की अनुमति नहीं होगी, सिर्फ टेक्स्ट चैट्स तक सीमित रहेगा।
लेकिन इस प्लान ने कंपनी के अंदर ही तीखी बहस छेड़ दी। ओपनएआई की वेलबीइंग एंड एआई एडवाइजरी काउंसिल के सदस्यों, जिनमें मनोवैज्ञानिक और कॉग्निटिव न्यूरोसाइंटिस्ट शामिल हैं, ने एकमत होकर विरोध जताया। जनवरी में हुई मीटिंग में उन्होंने चेतावनी दी कि एआई-पावर्ड एरोटिका यूजर्स में अस्वास्थ्यकर भावनात्मक निर्भरता पैदा कर सकती है। साथ ही, ऑफलाइन सोशल और रोमांटिक रिलेशनशिप्स को भी प्रभावित कर सकती है।
कुछ सदस्यों ने इसे “सेक्सी सुसाइड कोच” बनाने का खतरा बताया, जहां एरोटिक कंटेंट के साथ मानसिक स्वास्थ्य संबंधी जोखिम बढ़ सकते हैं। नाबालिगों की सुरक्षा को लेकर भी गंभीर चिंता जताई गई, क्योंकि एज-वेरिफिकेशन सिस्टम में लूपहोल्स रह सकते हैं और बच्चे आसानी से एक्सेस कर सकते हैं।
इस विरोध के बावजूद कंपनी ने आगे बढ़ने का फैसला किया, लेकिन हाल ही में एडल्ट मोड के लॉन्च को टाल दिया गया। ओपनएआई ने कहा कि अब अन्य ज्यादा प्राथमिक कामों पर फोकस है, जैसे इंटेलिजेंस में सुधार, पर्सनैलिटी इम्प्रूवमेंट, पर्सनलाइजेशन और यूजर एक्सपीरियंस को प्रोएक्टिव बनाना। कंपनी के पास चैटजीपीटी के 900 मिलियन से ज्यादा यूजर्स हैं, इसलिए प्रोडक्ट परफॉर्मेंस और यूजर सेफ्टी को प्राथमिकता दी जा रही है।
एडल्ट मोड पर कंपनी का तर्क है कि पहले चैटजीपीटी को बहुत रेस्ट्रिक्टिव बनाया गया था ताकि मानसिक स्वास्थ्य मुद्दों से बचा जा सके, लेकिन अब नए टूल्स से यह संतुलन बनाया जा सकता है। सैम ऑल्टमैन ने स्पष्ट किया कि कंपनी “दुनिया की चुनी हुई मॉरल पुलिस” नहीं है, लेकिन नुकसान पहुंचाने वाले कंटेंट जैसे नॉन-कंसेंशुअल बिहेवियर या चाइल्ड सेक्सुअल अब्यूज को कभी अनुमति नहीं दी जाएगी।
बाहरी विशेषज्ञों और निवेशकों ने भी चिंता जताई है। मार्क क्यूबन जैसे निवेशक ने कहा कि पैरेंट्स और स्कूल्स ट्रस्ट खो देंगे अगर एज-गेटिंग बाईपास हो गई। कई का मानना है कि यह कदम रेवेन्यू बढ़ाने की कोशिश है, क्योंकि एरोटिका AI इंडस्ट्री में बड़ा मार्केट है।
ओपनएआई अब एज-प्रेडिक्शन और कंटेंट मॉडरेशन को और मजबूत करने पर काम कर रही है। नया टाइमलाइन घोषित नहीं किया गया है, लेकिन कंपनी का कहना है कि “एडल्ट्स को एडल्ट की तरह ट्रीट” करने का सिद्धांत बरकरार है, बस इसे सही तरीके से लागू करने में समय लगेगा।