“एक समय था जब ये 4 डीजल कारें भारतीय बाजार पर राज करती थीं—बेहतरीन माइलेज, जबरदस्त टॉर्क और लंबी दूरी की यात्रा के लिए बेस्ट मानी जाती थीं। लेकिन सख्त उत्सर्जन नियमों, BS6 फेज 2 की चुनौतियों, बढ़ती लागत और इलेक्ट्रिक-हाइब्रिड की ओर शिफ्ट के कारण इनका उत्पादन बंद हो गया। असली वजहें पर्यावरण, अर्थव्यवस्था और तकनीकी बदलाव हैं, जो अब डीजल कारों के युग को लगभग खत्म कर रही हैं।”
भारत में 2010 से 2020 के बीच डीजल कारों का बोलबाला था। सस्ता डीजल, बेहतर माइलेज और हाई टॉर्क की वजह से ये कारें परिवारों, टैक्सी ऑपरेटर्स और लंबी ड्राइव करने वालों की पहली पसंद बनीं। लेकिन पिछले कुछ सालों में स्थिति पूरी तरह बदल गई है। BS6 नॉर्म्स के बाद BS6 फेज 2 (RDE कंप्लायंस) ने छोटी और मिड-साइज डीजल कारों को महंगा और जटिल बना दिया। कई कंपनियों ने डीजल इंजन को पूरी तरह छोड़ दिया, जबकि कुछ बड़े मॉडल्स अभी भी चल रहे हैं लेकिन उनका भविष्य अनिश्चित है। यहां हम उन 4 ऐसी डीजल कारों की बात कर रहे हैं जो कभी बाजार में छाई हुई थीं लेकिन अब बंद हो चुकी हैं या उनका डीजल वर्जन गायब हो गया।
Volkswagen Vento Vento भारतीय बाजार में प्रीमियम सेडान का पर्याय थी। इसका 1.5 TDI और पहले का 1.6 TDI इंजन बेहद रिफाइंड, पावरफुल (110-150 Nm टॉर्क रेंज) और 20+ kmpl माइलेज देने वाला था। VW की जर्मन बिल्ड क्वालिटी, हैंडलिंग और स्पेस की वजह से ये कार युवाओं और फैमिली यूजर्स में हिट थी। लेकिन 2020 में BS6 नॉर्म्स के साथ VW ने डीजल को छोड़ दिया। असली वजह—BS6 फेज 2 के लिए SCR, DPF और AdBlue सिस्टम लगाना महंगा पड़ता, जबकि सेल्स पहले से ही घट रही थीं। VW ने India 2.0 प्लान के तहत पेट्रोल और इलेक्ट्रिक पर फोकस किया। नतीजा: Vento का प्रोडक्शन बंद, और अब मार्केट में सिर्फ पुरानी BS4/BS6 यूनिट्स बची हैं।
Fiat Linea Linea को भारत में ‘इटालियन ब्यूटी विद स्ट्रेंथ’ कहा जाता था। 1.3 Multijet और 1.6 Multijet डीजल इंजन के साथ ये कार 25 kmpl तक का माइलेज देती थी, साथ ही बॉडी-ऑन-फ्रेम जैसी मजबूती और स्पेसियस इंटीरियर। Fiat के T-Jet पेट्रोल वर्जन के अलावा डीजल वर्जन सबसे ज्यादा बिकता था। लेकिन Fiat भारत में संघर्ष कर रही थी, सेल्स कम होने और पार्ट्स की उपलब्धता की समस्या बढ़ने लगी। BS6 अपग्रेड के लिए भारी निवेश की जरूरत थी, जो कंपनी नहीं कर पाई। 2020 से पहले ही डीजल वर्जन बंद हो गए, और बाद में पूरा ब्रांड भारत से बाहर हो गया। वजह: कम सेल्स, हाई मेंटेनेंस कॉस्ट और उत्सर्जन नियमों का दबाव।
Chevrolet Cruze Cruze जनरल मोटर्स की आखिरी बड़ी कोशिश थी भारतीय प्रीमियम सेडान सेगमेंट में। 2.0 लीटर टर्बो डीजल इंजन (150 hp, 360 Nm) के साथ ये कार जबरदस्त परफॉर्मेंस देती थी—0-100 kmph मात्र 8-9 सेकंड में। लंबी ड्राइव, हाईवे क्रूजिंग और लग्जरी फील के लिए बेस्ट मानी जाती थी। लेकिन GM ने 2017-18 में भारत से पूरी तरह एग्जिट कर लिया। वजहें: लगातार घाटा, कम सेल्स (Cruze सालाना 1000-2000 यूनिट्स से ज्यादा नहीं बिकती थी), BS6 अपग्रेड की हाई कॉस्ट और SUV की बढ़ती डिमांड। Cruze का डीजल वर्जन बंद होना GM के भारत छोड़ने का हिस्सा था।
Honda Amaze Diesel (और इसी तरह के छोटे सेडान डीजल) Amaze का 1.5 i-DTEC डीजल इंजन कॉम्पैक्ट सेडान में बेस्ट माइलेज (24-25 kmpl) और रिफाइंड परफॉर्मेंस देता था। ये कार शहर और हाईवे दोनों के लिए परफेक्ट थी, खासकर टैक्सी और फ्लीट यूजर्स के लिए। लेकिन BS6 फेज 2 नॉर्म्स (2023 से लागू) के बाद Honda ने डीजल को पूरी तरह बंद कर दिया। वजह: छोटे इंजन में SCR और DPF फिट करना महंगा, जबकि पेट्रोल और हाइब्रिड ऑप्शन ज्यादा प्रॉफिटेबल। Honda अब Amaze को सिर्फ पेट्रोल में बेच रही है। इसी तरह Hyundai Aura, Maruti Dzire जैसे कई मॉडल्स का डीजल वर्जन गायब हो गया।
क्यों बंद हुईं ये डीजल कारें? मुख्य वजहें
BS6 और BS6 Phase 2 उत्सर्जन नियम : NOx और पार्टिकुलेट मैटर को कम करने के लिए AdBlue, DPF, SCR जैसे महंगे कंपोनेंट्स लगाने पड़े। छोटे कारों में ये लागत 1-2 लाख बढ़ा देता, जो बिक्री को प्रभावित करता।
पर्यावरण और सरकारी दबाव : 2027 तक बड़े शहरों (10 लाख+ आबादी) में डीजल 4-व्हीलर्स पर संभावित बैन की बात चल रही है। दिल्ली-NCR में पहले से ही पुरानी डीजल कारों पर पाबंदी है।
पेट्रोल vs डीजल प्राइस गैप कम होना : डीजल अब महंगा हो गया, माइलेज का फायदा घटा।
SUV और इलेक्ट्रिक/हाइब्रिड शिफ्ट : लोग अब Scorpio N, Fortuner (जो अभी डीजल में हैं) जैसी SUVs चुन रहे हैं, लेकिन छोटी डीजल सेडान्स की डिमांड खत्म।
कंपनियों की रणनीति : Maruti, VW, Honda जैसी कंपनियां डीजल से बाहर हो गईं, क्योंकि EV और हाइब्रिड में ज्यादा मार्जिन और फ्यूचर ग्रोथ है।
आज बाजार में सिर्फ कुछ बड़े SUVs जैसे Mahindra Scorpio N, Tata Safari, Toyota Fortuner और Isuzu MU-X में ही डीजल ऑप्शन बचा है, लेकिन उनका भी भविष्य 2027-2030 तक सीमित माना जा रहा है। डीजल का राज खत्म हो रहा है, और सड़कों पर अब पेट्रोल, CNG, हाइब्रिड और इलेक्ट्रिक का दौर शुरू हो चुका है।