भारत-कनाडा के बीच 2.6 अरब डॉलर की ऐतिहासिक यूरेनियम डील: अब एडवांस्ड न्यूक्लियर रिएक्टर्स पर भी होगा सहयोग

भारत और कनाडा ने 2.6 अरब डॉलर (कनाडाई डॉलर) की लंबी अवधि की यूरेनियम सप्लाई डील पर हस्ताक्षर किए हैं। Cameco कंपनी भारत के Atomic Energy Department को 9 साल में लगभग 22 मिलियन पाउंड यूरेनियम सप्लाई करेगी, जो 2027 से 2035 तक चलेगी। दोनों देश Small Modular Reactors (SMRs) और एडवांस्ड न्यूक्लियर रिएक्टर्स पर संयुक्त रूप से काम करेंगे, जिससे भारत की क्लीन एनर्जी और ऊर्जा सुरक्षा मजबूत होगी। यह डील द्विपक्षीय संबंधों में नई शुरुआत का संकेत है और 2030 तक 50 अरब डॉलर के व्यापार लक्ष्य की दिशा में अहम कदम है।

भारत-कनाडा यूरेनियम डील: क्लीन एनर्जी और रणनीतिक साझेदारी का नया अध्याय

नई दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और कनाडाई प्रधानमंत्री मार्क कार्नी की बैठक के दौरान भारत के Department of Atomic Energy और कनाडा की Cameco Corporation के बीच यूरेनियम सप्लाई का महत्वपूर्ण समझौता हुआ। यह डील करीब 2.6 अरब कनाडाई डॉलर (लगभग 1.9 अरब अमेरिकी डॉलर) की है, जो बाजार मूल्य US$86.95 प्रति पाउंड के आधार पर अनुमानित है।

Cameco 2027 से शुरू होकर 2035 तक कुल 22 मिलियन पाउंड (लगभग 11,000 टन) यूरेनियम ऑर कंसंट्रेट (U3O8) भारत को सप्लाई करेगी। यह मात्रा भारत के मौजूदा और आगामी न्यूक्लियर रिएक्टर्स के लिए ईंधन उपलब्ध कराएगी। यह समझौता 2015 में हुए 5 साल के पिछले कॉन्ट्रैक्ट का स्थान लेगा, लेकिन इसकी वैल्यू पिछले समझौते से लगभग 10 गुना अधिक है।

यह डील भारत की नागरिक परमाणु ऊर्जा महत्वाकांक्षा को मजबूती देगी। भारत का लक्ष्य 2032 तक न्यूक्लियर क्षमता को 22.5 गीगावाट तक बढ़ाना है, जबकि लंबे समय में 100 गीगावाट का रोडमैप है। कनाडा से स्थिर यूरेनियम सप्लाई मिलने से भारत की ऊर्जा सुरक्षा बढ़ेगी, खासकर जब ग्लोबल स्तर पर यूरेनियम की मांग बढ़ रही है और सप्लाई चेन में उतार-चढ़ाव आ रहे हैं।

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दोनों देशों ने Small Modular Reactors (SMRs) और एडवांस्ड न्यूक्लियर रिएक्टर्स के विकास में सहयोग पर भी सहमति जताई है। SMRs छोटे, मॉड्यूलर डिजाइन वाले रिएक्टर्स हैं जो पारंपरिक बड़े प्लांट्स से सस्ते, सुरक्षित और तेजी से लगाए जा सकते हैं। भारत में इनकी संभावना खनिज संपदा वाले इलाकों या रिमोट एरिया में बिजली उत्पादन के लिए उपयोगी होगी। एडवांस्ड रिएक्टर्स में बेहतर ईंधन उपयोगिता और कम वेस्ट जनरेशन जैसी तकनीकें शामिल हैं, जो भारत के थोरियम आधारित प्रोग्राम से भी जुड़ सकती हैं।

डील के प्रमुख बिंदु

अवधि : 9 वर्ष (2027-2035)

मात्रा : लगभग 22 मिलियन पाउंड U3O8

कुल वैल्यू : C$2.6 बिलियन (US$86.95/पाउंड पर आधारित)

सप्लायर : Cameco Corporation (सास्काचेवन, कनाडा)

खरीदार : भारत का Department of Atomic Energy

मूल्य निर्धारण : मार्केट-रिलेटेड टर्म्स पर

भारत के लिए फायदे

दीर्घकालिक ईंधन सुरक्षा — भारत घरेलू यूरेनियम उत्पादन पर निर्भर है लेकिन मात्रा सीमित है। कनाडा से आयात से रिएक्टर्स की क्षमता उपयोग बढ़ेगा।

क्लीन एनर्जी ट्रांजिशन — न्यूक्लियर बेस लोड पावर प्रदान करता है, जो सोलर-विंड जैसी रिन्यूएबल्स के साथ बैलेंस करता है।

तकनीकी सहयोग — SMRs और एडवांस्ड टेक्नोलॉजी में कनाडा की विशेषज्ञता भारत के इंडिजिनस प्रोग्राम को बूस्ट देगी।

आर्थिक प्रभाव — यह डील CEPA (Comprehensive Economic Partnership Agreement) की नेगोशिएशंस को तेज करेगी, जिसका लक्ष्य 2026 के अंत तक पूरा करना है।

व्यापक सहयोग के आयाम

यह समझौता सिर्फ यूरेनियम तक सीमित नहीं है। दोनों देशों ने क्रिटिकल मिनरल्स, रिन्यूएबल एनर्जी, हाइड्रोजन और LNG जैसे क्षेत्रों में भी साझेदारी बढ़ाने पर जोर दिया। द्विपक्षीय व्यापार को 2030 तक 50 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है। यह डील दोनों देशों के बीच पिछले तनावों के बाद संबंधों को रीसेट करने का मजबूत संकेत है।

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यह कदम भारत की नेट जीरो 2070 लक्ष्य और ऊर्जा मिश्रण में न्यूक्लियर की हिस्सेदारी बढ़ाने की रणनीति से जुड़ा है। कनाडा को भारत जैसे बड़े बाजार में अपने यूरेनियम इंडस्ट्री के लिए स्थिर डिमांड मिलेगी।

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