अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने 20 फरवरी 2026 को ट्रंप के पुराने IEEPA-आधारित टैरिफ को गैरकानूनी घोषित कर दिया, जिससे कई देशों पर लगे 10-50% टैरिफ रद्द हो गए। ट्रंप ने तुरंत प्रतिक्रिया में Section 122 के तहत नया 10% वैश्विक टैरिफ लगाने का आदेश जारी किया, जो 24 फरवरी 2026 से प्रभावी होगा और 150 दिनों तक चलेगा। यह टैरिफ ज्यादातर आयातों पर लागू होगा, लेकिन कुछ सेक्टर जैसे कृषि उत्पाद, फार्मास्यूटिकल्स, एनर्जी और USMCA-अनुपालित वस्तुओं को छूट मिलेगी। भारत समेत कई देशों के निर्यात पर असर पड़ सकता है, जबकि व्हाइट हाउस ने नए जांच और छूट प्रक्रियाओं की तैयारी शुरू कर दी है।
ट्रंप का नया टैरिफ: सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद त्वरित कार्रवाई
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले के कुछ घंटों बाद ही ओवल ऑफिस से एक एग्जीक्यूटिव ऑर्डर पर हस्ताक्षर किए, जिसमें सभी देशों से होने वाले आयात पर 10% का अस्थायी ग्लोबल टैरिफ लगाया गया है। यह टैरिफ 24 फरवरी 2026 की आधी रात 12:01 बजे से लागू होगा और शुरुआत में 150 दिनों (लगभग 5 महीने) तक प्रभावी रहेगा। व्हाइट हाउस ने इसकी पुष्टि करते हुए फैक्ट शीट जारी की, जिसमें स्पष्ट किया गया कि यह कदम अंतरराष्ट्रीय भुगतान संतुलन की समस्याओं को दूर करने और अमेरिकी अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए उठाया गया है।
सुप्रीम कोर्ट ने 6-3 के बहुमत से फैसला दिया कि इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट (IEEPA) के तहत ट्रंप द्वारा लगाए गए पिछले टैरिफ राष्ट्रपति की शक्तियों से बाहर थे। इस फैसले से पिछले साल लगाए गए रेसिप्रोकल टैरिफ, जिनमें कनाडा, मैक्सिको और चीन पर 10-50% तक के शुल्क शामिल थे, अमान्य हो गए। कोर्ट ने IEEPA को आपातकालीन स्थितियों में विदेशी खतरों से निपटने के लिए सीमित माना, न कि व्यापक टैरिफ लगाने के लिए। हालांकि, कोर्ट ने रिफंड या इंपोर्टर्स को राहत पर कोई टिप्पणी नहीं की, जिससे बाजारों में अनिश्चितता बनी हुई है।
ट्रंप ने व्हाइट हाउस प्रेस ब्रीफिंग में इस फैसले पर कड़ी प्रतिक्रिया दी और जस्टिसेज को निशाना बनाया, खासकर उन दो कंजर्वेटिव जस्टिसेज को जो उनके द्वारा नियुक्त थे लेकिन फैसले में उनके खिलाफ गए। उन्होंने कहा कि यह फैसला अमेरिकी वर्कर्स और मैन्युफैक्चरर्स के हितों के खिलाफ है। इसके तुरंत बाद नए टैरिफ का ऐलान किया गया, जो ट्रेड एक्ट 1974 की सेक्शन 122 के तहत लगाया जा रहा है। यह सेक्शन राष्ट्रपति को ट्रेड डेफिसिट या करेंसी डेप्रिसिएशन जैसी समस्याओं के लिए 15% तक का टैरिफ 150 दिनों के लिए लगाने की अनुमति देता है।
किन वस्तुओं पर लागू होगा नया टैरिफ और छूट की सूची
व्हाइट हाउस फैक्ट शीट के अनुसार, नया 10% टैरिफ लगभग सभी आयातों पर लागू होगा, लेकिन कुछ महत्वपूर्ण छूट हैं:
महत्वपूर्ण खनिज, एनर्जी उत्पाद और फर्टिलाइजर्स जो अमेरिका में पर्याप्त मात्रा में नहीं बनते।
कुछ कृषि उत्पाद जैसे बीफ, टमाटर, संतरा।
फार्मास्यूटिकल्स और उनके इंग्रीडिएंट्स।
कुछ इलेक्ट्रॉनिक्स, पैसेंजर व्हीकल्स, लाइट ट्रक्स और एयरोस्पेस उत्पाद।
USMCA (अमेरिका-मैक्सिको-कनाडा एग्रीमेंट) के तहत अनुपालित वस्तुएं कनाडा और मैक्सिको से।
CAFTA-DR के तहत कुछ टेक्सटाइल और अपैरल।
सेक्शन 232 के तहत पहले से लगे टैरिफ वाली वस्तुएं।
यह छूट अमेरिकी अर्थव्यवस्था की जरूरतों और घरेलू सप्लाई चेन को मजबूत रखने के लिए दी गई हैं। व्हाइट हाउस ने स्पष्ट किया कि सेक्रेटरी ऑफ कॉमर्स को अतिरिक्त छूट देने का अधिकार है।
व्हाइट हाउस की तैयारियां और आगे की रणनीति
व्हाइट हाउस अब नए टैरिफ की इंप्लीमेंटेशन के लिए तेजी से काम कर रहा है। कस्टम्स एंड बॉर्डर प्रोटेक्शन (CBP) को निर्देश दिए गए हैं कि 24 फरवरी से आयातों पर यह ड्यूटी कलेक्ट की जाए। साथ ही, सेक्शन 301 के तहत नए इन्वेस्टिगेशन शुरू करने की योजना है, जो अनफेयर ट्रेड प्रैक्टिसेज पर आधारित अतिरिक्त टैरिफ लगा सकते हैं। ट्रंप प्रशासन का कहना है कि यह कदम अमेरिकी वर्कर्स को प्रोटेक्ट करने और ट्रेड डेफिसिट कम करने के लिए जरूरी है।
भारत जैसे देशों पर असर: भारत से निर्यात होने वाले जेम्स, फार्मास्यूटिकल्स और कुछ इंडस्ट्रियल गुड्स पर पहले से कम टैरिफ था, लेकिन नया 10% ग्लोबल टैरिफ लागू होने से लागत बढ़ सकती है। हालांकि, कुछ सेक्टरों में छूट मिलने से राहत मिल सकती है। भारतीय सरकार और एक्सपोर्टर्स ‘वेट एंड वॉच’ मोड में हैं, जबकि अमेरिका के साथ ट्रेड नेगोशिएशंस तेज हो सकते हैं।
यह नया टैरिफ ट्रंप की ट्रेड पॉलिसी में निरंतरता दिखाता है, जहां सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बावजूद अमेरिकी हितों को प्राथमिकता दी जा रही है।
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