“शेयर बाजार में वीकली और मंथली एक्सपायरी शब्द अक्सर सुनाई देते हैं, लेकिन इनका असली मतलब क्या है? जानिए कैसे ये ट्रेडर्स की रणनीति, वोलैटिलिटी और रिस्क को प्रभावित करते हैं, और NSE के लेटेस्ट नियमों के अनुसार Nifty तथा Bank Nifty में इनकी एक्सपायरी कब और कैसे होती है।”
शेयर मार्केट में वीकली और मंथली एक्सपायरी क्या है? आसान शब्दों में समझें
फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस (F&O) सेगमेंट में एक्सपायरी का मतलब कॉन्ट्रैक्ट की समाप्ति तिथि से है। जब कोई फ्यूचर्स या ऑप्शंस कॉन्ट्रैक्ट एक्सपायर होता है, तो उसकी वैल्यू शून्य हो जाती है अगर इन-द-मनी नहीं है, या कैश सेटलमेंट के जरिए पोजीशन बंद हो जाती है। भारतीय शेयर बाजार में NSE पर मुख्य रूप से Nifty 50 और Bank Nifty जैसे इंडेक्स पर ये कॉन्ट्रैक्ट ट्रेड होते हैं।
वीकली एक्सपायरी का मतलब
वीकली एक्सपायरी हर सप्ताह होने वाली समाप्ति है। Nifty 50 इंडेक्स पर फिलहाल 4 वीकली कॉन्ट्रैक्ट उपलब्ध रहते हैं (मंथली को छोड़कर)। ये हर सप्ताह के मंगलवार को एक्सपायर होते हैं। अगर मंगलवार को छुट्टी हो, तो पिछला ट्रेडिंग दिन एक्सपायरी डे बन जाता है।
उदाहरण: फरवरी 2026 में Nifty की वीकली एक्सपायरी 3 फरवरी, 10 फरवरी, 17 फरवरी और 24 फरवरी को हो सकती है (अगर कोई छुट्टी न हो)।
Bank Nifty, FinNifty, Midcap Select और Next 50 जैसे अन्य इंडेक्स पर वीकली कॉन्ट्रैक्ट अब उपलब्ध नहीं हैं। SEBI के नियमों के बाद केवल Nifty 50 पर ही वीकली ऑप्शंस चलते हैं।
वीकली कॉन्ट्रैक्ट छोटी अवधि के होते हैं, इसलिए समय मूल्य (टाइम वैल्यू) तेजी से घटता है। इससे वोलैटिलिटी ज्यादा रहती है और ट्रेडर्स इंट्राडे या शॉर्ट-टर्म स्ट्रैटेजी जैसे स्ट्रैडल, स्ट्रैंगल या आयरन कोंडोर अपनाते हैं।
मंथली एक्सपायरी का मतलब
मंथली एक्सपायरी हर महीने की आखिरी तारीख पर होती है। NSE पर Nifty 50, Bank Nifty, FinNifty, Midcap Select और Nifty Next 50 के मंथली कॉन्ट्रैक्ट महीने के आखिरी मंगलवार को एक्सपायर होते हैं।
Nifty 50 और Bank Nifty दोनों के लिए एक्सपायरी दिन अब मंगलवार है (पहले Bank Nifty के लिए बुधवार या गुरुवार होता था, लेकिन 2025 से बदलाव आया)।
उदाहरण: जनवरी 2026 में Bank Nifty मंथली एक्सपायरी 27 जनवरी (मंगलवार) को हुई। फरवरी 2026 में यह 24 फरवरी को हो सकती है।
मंथली कॉन्ट्रैक्ट में ट्रेडिंग साइकिल 3 महीने की होती है – नियर मंथ, मिड मंथ और फार मंथ। क्वार्टरली (मार्च, जून, सितंबर, दिसंबर) और हाफ-ईयरली भी उपलब्ध रहते हैं।
इनमें लंबी अवधि होने से टाइम डिके धीमा होता है, इसलिए पोजीशनल ट्रेडिंग, हेजिंग या लॉन्ग-टर्म व्यू के लिए बेहतर माने जाते हैं।
वीकली vs मंथली एक्सपायरी में मुख्य अंतर
एक्सपायरी दिन बाजार पर क्या असर पड़ता है?
| पैरामीटर | वीकली एक्सपायरी | मंथली एक्सपायरी |
|---|---|---|
| अवधि | 1 सप्ताह | 1 महीना (या अधिक) |
| एक्सपायरी दिन | हर मंगलवार (Nifty पर) | महीने का आखिरी मंगलवार |
| वोलैटिलिटी | बहुत अधिक (त्वरित उतार-चढ़ाव) | मध्यम से उच्च |
| टाइम डिके | तेज (थीटा ज्यादा प्रभावी) | धीमा |
| लिक्विडिटी | उच्च, खासकर एक्सपायरी के करीब | बहुत उच्च, पूरे महीने |
| उपयुक्त ट्रेडर्स | इंट्राडे, शॉर्ट-टर्म, हाई रिस्क | पोजीशनल, हेजिंग, मध्यम रिस्क |
| उपलब्ध इंडेक्स | केवल Nifty 50 | Nifty, Bank Nifty, FinNifty आदि |
एक्सपायरी दिन पर ओपन इंटरेस्ट (OI) बड़े पैमाने पर शिफ्ट होता है। ट्रेडर्स पोजीशन रोलओवर करते हैं या नए स्ट्राइक चुनते हैं। इससे बाजार में आखिरी 1-2 घंटे में तेज मूवमेंट देखने को मिलता है, जिसे ‘एक्सपायरी वोलैटिलिटी’ कहते हैं। वीकली एक्सपायरी पर छोटे ट्रेडर्स ज्यादा सक्रिय रहते हैं, जबकि मंथली पर संस्थागत निवेशक (FII/DII) का प्रभाव ज्यादा होता है।
ट्रेडर्स के लिए महत्वपूर्ण टिप्स
वीकली में प्रीमियम तेज घटता है, इसलिए ऑप्शन बायर्स को सावधानी बरतनी चाहिए।
मंथली में सपोर्ट/रेजिस्टेंस लेवल ज्यादा मजबूत रहते हैं।
हमेशा OI डेटा, PCR रेशियो और IV (इम्प्लाइड वोलैटिलिटी) चेक करें।
लॉट साइज में 2026 से बदलाव आया है, जिससे रिटेल ट्रेडर्स के लिए मार्जिन कम हुआ है।
एक्सपायरी समझना F&O ट्रेडिंग की बुनियाद है। सही समय पर एंट्री-एग्जिट से रिस्क कंट्रोल होता है और प्रॉफिट की संभावना बढ़ती है।
Disclaimer: यह लेख केवल शैक्षिक उद्देश्य से है। शेयर बाजार में निवेश जोखिम भरा है। कोई भी ट्रेडिंग निर्णय से पहले विशेषज्ञ सलाह लें।