भारत का वनस्पति तेल आयात पहली तिमाही में 2% घटकर 39.6 लाख टन रहा; पाम तेल में उछाल के बावजूद सोयाबीन-सूरजमुखी की कम खरीदारी बनी वजह

“भारत का वनस्पति तेल आयात तेल वर्ष 2025-26 की पहली तिमाही (नवंबर 2025-जनवरी 2026) में 2% की गिरावट के साथ 39.6 लाख टन पर आ गया है। पाम तेल आयात में 18% की मजबूत बढ़ोतरी के बावजूद सोयाबीन और सूरजमुखी तेल की कम खरीदारी ने कुल आयात को प्रभावित किया है। इससे घरेलू स्टॉक प्रबंधन और वैश्विक मूल्य गतिशीलता का संकेत मिलता है।”

वनस्पति तेल आयात में मामूली गिरावट, पाम तेल की हिस्सेदारी बढ़ी

भारत, दुनिया का सबसे बड़ा वनस्पति तेल आयातक देश, तेल वर्ष 2025-26 की शुरुआती तिमाही में आयात में हल्की कमी दर्ज कर रहा है। Solvent Extractors’ Association (SEA) के आंकड़ों के अनुसार, नवंबर 2025 से जनवरी 2026 तक कुल वनस्पति तेल आयात (खाद्य और अखाद्य सहित) 39.6 लाख टन रहा, जो पिछले साल की समान अवधि के 40.5 लाख टन से 2% कम है।

इस गिरावट का मुख्य कारण सोयाबीन तेल और सूरजमुखी तेल के आयात में कमी है, जबकि पाम तेल की खरीदारी में उल्लेखनीय वृद्धि हुई। पाम तेल आयात इस दौरान 18% बढ़कर 19.1 लाख टन हो गया, जो एक साल पहले 16.2 लाख टन था। इससे पाम तेल की कुल आयात में हिस्सेदारी मजबूत हुई है।

आयात में बदलाव के प्रमुख कारक

मूल्य प्रतिस्पर्धा : पाम तेल अन्य तेलों की तुलना में सस्ता रहा, जिससे रिफाइनर्स ने इसे प्राथमिकता दी। सोयाबीन और सूरजमुखी तेल के वैश्विक दाम अपेक्षाकृत ऊंचे रहने से उनकी मांग घटी।

मौसमी प्रभाव : सर्दियों में खपत पैटर्न बदलता है, जिससे कुछ तेलों की मांग प्रभावित हुई। दिसंबर में पाम तेल आयात 20% घटकर 5.07 लाख टन पर आ गया, जो अप्रैल 2025 के बाद सबसे कम था।

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घरेलू स्टॉक और मांग : घरेलू तेल बीज उत्पादन में सुधार और स्टॉक स्तरों के प्रबंधन से आयात की जरूरत कम हुई। हालांकि कुल मांग स्थिर बनी हुई है।

नेपाल रूट से रिफाइंड तेल : SAFTA समझौते के तहत नेपाल से जीरो ड्यूटी पर रिफाइंड तेल आयात बढ़ा, जिसमें दिसंबर में करीब 48,000 टन शामिल था।

तेल-वार आयात विवरण (नवंबर 2025-जनवरी 2026)

2025-26 तेल वर्ष का अनुमानित परिदृश्य

तेल का प्रकारआयात मात्रा (लाख टन)पिछले साल की तुलना में बदलावहिस्सेदारी (%)
पाम तेल19.1+18%प्रमुख वृद्धि
सोयाबीन तेलघटा (विवरण सीमित)कमीप्रभावित
सूरजमुखी तेलघटाकमीप्रभावित
कुल वनस्पति तेल39.6-2%100

उद्योग विशेषज्ञों के अनुसार, पूरे 2025-26 तेल वर्ष (अक्टूबर-सितंबर) में कुल आयात 16.7 मिलियन टन (लगभग 167 लाख टन) रह सकता है। घरेलू उत्पादन 9.6 मिलियन टन अनुमानित है, जो मांग का मात्र 40% पूरा करेगा। पाम तेल आयात 8-8.5 मिलियन टन, सोयाबीन तेल 5-5.5 मिलियन टन और सूरजमुखी तेल 2.8-3 मिलियन टन रहने की संभावना है।

पिछले वर्षों की तुलना में पाम तेल की हिस्सेदारी घट रही है (2024-25 में 47% तक), जबकि सोयाबीन और सूरजमुखी तेल की हिस्सेदारी बढ़ी है। 2025-26 में यह ट्रेंड उलट सकता है, क्योंकि पाम तेल सस्ता होने से रिफाइनर्स फिर से इसकी ओर मुड़ रहे हैं।

उपभोक्ता स्तर पर प्रभाव

आयात में यह बदलाव खाद्य तेल की कीमतों पर सीधा असर डाल सकता है। पाम तेल आधारित तेल सस्ते रहने से उपभोक्ताओं को राहत मिल सकती है, लेकिन सोयाबीन और सूरजमुखी तेल महंगे होने से ब्रांडेड पैकेज्ड तेलों की कीमतें प्रभावित हो सकती हैं। सरकार की नीतियां जैसे ड्यूटी संरचना और घरेलू उत्पादन बढ़ावा भी कीमत स्थिरता में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी।

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Disclaimer: यह खबर उपलब्ध आंकड़ों और उद्योग अनुमानों पर आधारित है। बाजार में उतार-चढ़ाव संभव है।

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