“सरकार ने भारत हैवी इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड (BHEL) में अपनी 5% तक हिस्सेदारी बेचने के लिए ऑफर फॉर सेल (OFS) शुरू किया है। फ्लोर प्राइस ₹254 प्रति शेयर तय किया गया है, जो पिछले बंद भाव से लगभग 8% कम है। इससे सरकार को पूरी बिक्री पर ₹4,422 करोड़ मिल सकते हैं। ऐलान के बाद BHEL का शेयर 6% तक गिरकर ₹259.25 के निचले स्तर पर पहुंचा। गैर-खुदरा निवेशक आज बोली लगा सकते हैं, जबकि रिटेल निवेशकों के लिए कल मौका है। यह विनिवेश कार्यक्रम का हिस्सा है, जिससे वित्त वर्ष में अब तक ₹8,768 करोड़ जुट चुके हैं।”
सरकार डिस्काउंट पर बेच रही है BHEL के शेयर, ऐलान से स्टॉक 6% टूटा; समझें पूरा OFS प्लान
केंद्र सरकार ने राज्य के स्वामित्व वाली कंपनी भारत हैवी इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड (BHEL) में अपनी हिस्सेदारी कम करने के लिए ऑफर फॉर सेल (OFS) लॉन्च किया है। यह कदम विनिवेश लक्ष्यों को पूरा करने की दिशा में उठाया गया है। OFS के तहत सरकार शुरुआत में 3% हिस्सेदारी बेचेगी, जिसमें अतिरिक्त 2% ग्रीनशू ऑप्शन के जरिए बेचने का प्रावधान है, यदि मांग अधिक रही तो। कुल मिलाकर अधिकतम 5% हिस्सेदारी यानी 17.41 करोड़ शेयर बिक्री के लिए उपलब्ध हैं।
फ्लोर प्राइस ₹254 प्रति शेयर तय किया गया है, जो मंगलवार के बंद भाव ₹276.05 से करीब 8% कम है। इस डिस्काउंट की वजह से बाजार में तुरंत प्रतिक्रिया आई और BHEL का शेयर बुधवार को शुरुआती कारोबार में 6% तक गिरकर NSE पर ₹259.25 के निचले स्तर पर पहुंच गया। BSE पर भी यह 5.74% गिरकर ₹260.20 पर ट्रेड कर रहा था।
OFS की संरचना इस प्रकार है:
आधार ऑफर: 3% हिस्सेदारी, यानी 10.44 करोड़ से अधिक शेयर।
ग्रीनशू ऑप्शन: अतिरिक्त 2% हिस्सेदारी, यानी 6.96 करोड़ से अधिक शेयर।
कुल संभावित बिक्री: 17.41 करोड़ शेयर।
यदि पूरी बिक्री फ्लोर प्राइस पर हुई तो सरकार को ₹4,422 करोड़ प्राप्त होंगे।
बोली लगाने का कार्यक्रम:
गैर-खुदरा निवेशक (संस्थागत निवेशक आदि): 11 फरवरी 2026 (बुधवार)।
रिटेल निवेशक: 12 फरवरी 2026 (गुरुवार)।
सरकार वर्तमान में BHEL में 63.17% हिस्सेदारी रखती है। इस OFS के बाद यह हिस्सेदारी घट सकती है, लेकिन प्रबंधन नियंत्रण बरकरार रहेगा क्योंकि बहुमत अभी भी सरकार के पास रहेगा। यह कदम वित्त वर्ष 2025-26 के विनिवेश कार्यक्रम का हिस्सा है, जिसमें अब तक विभिन्न PSU से ₹8,768 करोड़ जुटाए जा चुके हैं।
BHEL, जो पावर प्लांट उपकरण और इंजीनियरिंग क्षेत्र में प्रमुख कंपनी है, हाल के वर्षों में ऑर्डर बुक में सुधार दिखा रही है। हालांकि, OFS जैसी बिक्री से शेयरों में अल्पकालिक दबाव आना आम है, क्योंकि डिस्काउंट पर उपलब्धता से मौजूदा शेयरधारकों में बिकवाली का रुझान बढ़ता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि OFS अच्छी सब्सक्रिप्शन प्राप्त करता है तो इससे कंपनी की तरलता बढ़ेगी और लंबी अवधि में निवेशकों के लिए सकारात्मक साबित हो सकता है।
OFS का मुख्य उद्देश्य सरकार के विनिवेश लक्ष्यों को हासिल करना है, जिससे प्राप्त राशि को अन्य विकास परियोजनाओं में लगाया जा सकता है। रिटेल निवेशकों के लिए यह डिस्काउंटेड मूल्य पर शेयर खरीदने का अवसर प्रदान करता है, लेकिन बाजार की अस्थिरता को ध्यान में रखते हुए सतर्क रहना जरूरी है।
डिस्क्लेमर: यह खबर सूचना के उद्देश्य से है। निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार से परामर्श लें।