“स्टेट बैंक ऑफ इंडिया ने Q3 में ₹21,028 करोड़ का नेट प्रॉफिट दर्ज किया, जो साल-दर-साल 24.5% की बढ़ोतरी है। नेट इंटरेस्ट इनकम में 9% का इजाफा हुआ, जबकि एसेट क्वालिटी में सुधार दिखा—ग्रॉस एनपीए 2.15% और नेट एनपीए 0.39% पर आ गया। लोन ग्रोथ 15.4% रही, जिससे बैंक ने FY26 के लिए क्रेडिट ग्रोथ गाइडेंस 13-15% तक बढ़ा दी।”
स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) ने दिसंबर तिमाही में अपने प्रदर्शन से सभी को चौंका दिया है। बैंक का स्टैंडअलोन नेट प्रॉफिट ₹21,028 करोड़ पहुंच गया, जो पिछली समान तिमाही के ₹16,891 करोड़ से 24.5% अधिक है। यह अब तक का सबसे ऊंचा तिमाही प्रॉफिट है, जो मजबूत लोन ग्रोथ और नॉन-इंटरेस्ट इनकम से संचालित हुआ। एनालिस्ट्स की उम्मीदें ₹17,326 करोड़ की थीं, लेकिन SBI ने इससे कहीं बेहतर नतीजे दिए।
नेट इंटरेस्ट इनकम (NII) में 9% की वृद्धि दर्ज की गई, जो ₹45,190 करोड़ रही। यह डोमेस्टिक लोन में बढ़ोतरी से संभव हुआ, जहां रिटेल और SME सेगमेंट ने मजबूत योगदान दिया। नेट इंटरेस्ट मार्जिन (NIM) 3.12% पर स्थिर रहा, लेकिन बैंक की फंडिंग कॉस्ट में मामूली बढ़ोतरी के बावजूद कोर परफॉर्मेंस मजबूत दिखी। नॉन-इंटरेस्ट इनकम में 66% का उछाल आया, जो ₹3,279 करोड़ के ट्रेजरी गेंस, ₹1,521 करोड़ के फॉरेक्स और डेरिवेटिव्स प्रॉफिट, साथ ही फी इनकम और मिसलेनियस इनकम से आया। SBI म्यूचुअल फंड से मिले ₹2,200 करोड़ के डिविडेंड ने भी इसमें बड़ा रोल निभाया।
एसेट क्वालिटी में लगातार सुधार SBI की ताकत बना हुआ है। ग्रॉस नॉन-परफॉर्मिंग एसेट्स (GNPA) घटकर 2.15% हो गया, जो पिछली तिमाही के 2.21% से कम है। नेट एनपीए (NNPA) 0.39% पर आ गया, जो बैंक की रिकवरी स्ट्रैटजी की सफलता दर्शाता है। प्रोविजन एंड कंटिंजेंसीज में कमी आई, जो ₹6,878 करोड़ रही, जबकि राइटन-ऑफ अकाउंट्स से रिकवरी बढ़ी। कैपिटल एडिक्वेसी रेशियो (CRAR) 14.05% पर मजबूत रहा, जो टियर-1 कैपिटल के साथ बैंक को आगे ग्रोथ के लिए तैयार रखता है।
लोन बुक में 15.4% की सालाना वृद्धि दर्ज हुई, जो ₹39 लाख करोड़ से ऊपर पहुंच गई। रिटेल लोन 16% बढ़े, जिसमें होम लोन और पर्सनल लोन प्रमुख रहे। SME सेगमेंट में 20% की ग्रोथ देखी गई, जबकि कॉर्पोरेट लोन 12% बढ़े। डिपॉजिट्स में 12% की बढ़ोतरी हुई, जो ₹50 लाख करोड़ के पार चली गई। CASA रेशियो 40% पर स्थिर रहा, जो लो-कॉस्ट फंडिंग सुनिश्चित करता है। बैंक ने FY26 के लिए क्रेडिट ग्रोथ गाइडेंस को 13-15% तक बढ़ा दिया, जो ट्रेड डील्स और बजट ऐलान से प्रेरित है।
प्रमुख फाइनेंशियल हाइलाइट्स (तिमाही आधार पर):
| पैरामीटर | Q3 FY26 (₹ करोड़) | Q3 FY25 (₹ करोड़) | YoY ग्रोथ (%) |
|---|---|---|---|
| नेट प्रॉफिट | 21,028 | 16,891 | 24.5 |
| नेट इंटरेस्ट इनकम | 45,190 | 41,446 | 9.0 |
| ऑपरेटिंग प्रॉफिट | 32,116 | 22,940 | 40.0 |
| टोटल एसेट्स | 65,00,000 | 58,00,000 | 12.1 |
| टोटल एडवांसेज | 39,00,000 | 33,80,000 | 15.4 |
| टोटल डिपॉजिट्स | 50,00,000 | 44,64,000 | 12.0 |
SBI की यह परफॉर्मेंस बैंकिंग सेक्टर के लिए सकारात्मक संकेत है, खासकर जब इकोनॉमिक स्लोडाउन की आशंकाएं हैं। बैंक ने MSME और एग्रीकल्चर सेगमेंट में फोकस बढ़ाया, जहां लोन डिस्बर्समेंट 25% ऊपर गया। डिजिटल बैंकिंग में YONO ऐप के जरिए ट्रांजैक्शंस 30% बढ़े, जो फी इनकम को बूस्ट दे रहा है। चेयरमैन सीएस सेट्टी ने कहा कि ब्रॉड-बेस्ड ग्रोथ और एसेट क्वालिटी सुधार से बैंक FY26 में 14% क्रेडिट ग्रोथ टारगेट कर रहा है।
सेगमेंट-वाइज ब्रेकडाउन में रिटेल बैंकिंग ने ₹12,000 करोड़ का योगदान दिया, जबकि कॉर्पोरेट बैंकिंग से ₹8,500 करोड़ आए। इंटरनेशनल ऑपरेशंस में 10% ग्रोथ रही, जो ग्लोबल ट्रेड से लाभान्वित हुए। बैंक की सब्सिडियरीज जैसे SBI लाइफ और SBI कार्ड्स ने भी मजबूत नतीजे दिए, जो ग्रुप लेवल पर प्रॉफिट को और ऊपर ले जा सकते हैं।
एसेट क्वालिटी में सुधार के प्रमुख कारण:
रिकवरी ड्राइव: ₹5,000 करोड़ से ज्यादा के बैड लोन्स रिकवर किए गए।
प्रिवेंटिव मॉनिटरिंग: स्ट्रेस्ड एसेट्स के लिए AI-बेस्ड टूल्स का इस्तेमाल।
सेक्टरल फोकस: इंफ्रास्ट्रक्चर और रिन्यूएबल एनर्जी में कम रिस्क वाले लोन बढ़ाए गए।
प्रोविजन कवरेज रेशियो: 92% पर पहुंचा, जो इंडस्ट्री एवरेज से ऊपर है।
यह नतीजे शेयर मार्केट में SBI के स्टॉक को बूस्ट दे सकते हैं, जहां पहले से ही 8% की बढ़ोतरी देखी गई। बैंक ने डिविडेंड पॉलिसी पर भी हिंट दिया, जो निवेशकों के लिए आकर्षक हो सकता है। कुल मिलाकर, SBI की यह उपलब्धि पब्लिक सेक्टर बैंकिंग में नई ऊर्जा भर रही है, जहां प्राइवेट बैंकर्स से मुकाबला बढ़ रहा है।
Disclaimer: यह लेख सार्वजनिक रूप से उपलब्ध समाचार और रिपोर्ट्स पर आधारित है। इसमें दिए गए टिप्स केवल सूचनात्मक उद्देश्यों के लिए हैं।