“टॉमटॉम ट्रैफिक इंडेक्स 2025 के मुताबिक, भारत के प्रमुख शहरों में ट्रैफिक कंजेशन ने लोगों की जिंदगी मुश्किल बना दी है, जहां औसतन 100 से अधिक घंटे सालाना जाम में खर्च होते हैं। बेंगलुरु सबसे ज्यादा प्रभावित है, उसके बाद पुणे और मुंबई। समस्या के कारणों में बढ़ती आबादी, अपर्याप्त इंफ्रास्ट्रक्चर और वाहनों की संख्या शामिल हैं, जो अर्थव्यवस्था और स्वास्थ्य पर असर डाल रहे हैं।”
भारत के इन 10 शहरों में ट्रैफिक ने बढ़ाई टेंशन, सालभर में 100 घंटे जाम में फंसते हैं लोग
ट्रैफिक जाम की समस्या भारत के शहरी इलाकों में लगातार बढ़ रही है, जहां लाखों लोग रोजाना घंटों सड़कों पर फंसे रहते हैं। टॉमटॉम ट्रैफिक इंडेक्स 2025 की रिपोर्ट से पता चलता है कि इन शहरों में कंजेशन लेवल 49% से लेकर 74.4% तक पहुंच गया है, जिससे औसत स्पीड 16.6 किमी/घंटा से 25 किमी/घंटा के बीच रह गई है। इससे न सिर्फ समय की बर्बादी हो रही है, बल्कि ईंधन की खपत बढ़ रही है और प्रदूषण का स्तर भी ऊपर जा रहा है।
टॉप 10 शहरों की लिस्ट और डेटा
नीचे दी गई टेबल में टॉमटॉम ट्रैफिक इंडेक्स 2025 के आधार पर भारत के सबसे ज्यादा कंजेस्टेड शहरों की रैंकिंग, सालाना जाम में खर्च होने वाले घंटे, कंजेशन प्रतिशत, औसत स्पीड और अन्य मेट्रिक्स दिए गए हैं। ये आंकड़े शहरों में रश ऑवर के दौरान ट्रैफिक फ्लो पर आधारित हैं।
| रैंक | शहर | कंजेशन लेवल (%) | सालाना जाम में घंटे | औसत स्पीड (किमी/घंटा) | 15 मिनट में औसत दूरी (किमी) | 2024 से बदलाव (पीपी) |
|---|---|---|---|---|---|---|
| 1 | बेंगलुरु | 74.4 | 168 | 16.6 | 4.2 | +1.7 |
| 2 | पुणे | 71.1 | 152 | 18 | 4.5 | +5.4 |
| 3 | मुंबई | 63.2 | 126 | 20.8 | 5.2 | -3.3 |
| 4 | नई दिल्ली | 60.2 | 104 | 25 | 6.3 | +3.5 |
| 5 | कोलकाता | 58.9 | 150 | 17 | 4.3 | +0.3 |
| 6 | जयपुर | 58.7 | 121 | 20.5 | 5.1 | +0.4 |
| 7 | चेन्नई | 58.6 | 132 | 19.2 | 4.8 | +0.1 |
| 8 | हैदराबाद | 55.5 | 123 | 18.4 | 4.6 | -1.3 |
| 9 | एर्नाकुलम | 54.5 | 118 | 20.1 | 5.0 | +0.5 |
| 10 | अहमदाबाद | 49 | 106 | 20.7 | 5.2 | -3.8 |
इस टेबल से साफ है कि बेंगलुरु में लोग सालाना 168 घंटे जाम में फंसते हैं, जो करीब 7 दिनों के बराबर है। वहीं, पुणे में यह आंकड़ा 152 घंटे पहुंच गया है, जहां कंजेशन में 5.4 प्रतिशत पॉइंट की बढ़ोतरी हुई है।
ट्रैफिक जाम के प्रमुख कारण
इन शहरों में ट्रैफिक की समस्या के पीछे कई फैक्टर काम कर रहे हैं। बेंगलुरु और पुणे जैसे टेक हब में आईटी सेक्टर की ग्रोथ ने वाहनों की संख्या में तेजी से इजाफा किया है, लेकिन रोड नेटवर्क उतनी स्पीड से नहीं बढ़ा। उदाहरण के लिए, बेंगलुरु में रोजाना 1,500 से ज्यादा नए वाहन रजिस्टर होते हैं, जबकि मेट्रो और फ्लाईओवर प्रोजेक्ट्स में देरी हो रही है। मुंबई में लोकल ट्रेनों पर निर्भरता के बावजूद, सड़कों पर ऑटो और टैक्सी की भीड़ बढ़ गई है, खासकर मॉनसून सीजन में।
नई दिल्ली में प्रदूषण कंट्रोल के लिए ऑड-ईवन स्कीम लागू होने के बावजूद, कंजेशन 60.2% पर पहुंच गया है, क्योंकि प्राइवेट कारों का इस्तेमाल बढ़ा है। कोलकाता और चेन्नई में पुरानी इंफ्रास्ट्रक्चर और स्ट्रीट वेंडर्स की वजह से ट्रैफिक फ्लो बाधित होता है। जयपुर और अहमदाबाद जैसे शहरों में पर्यटन और इंडस्ट्रियल ग्रोथ ने समस्या को और गंभीर बना दिया है, जहां हाईवे ट्रिप रेशियो लगभग जीरो है, मतलब ज्यादातर ट्रैफिक लोकल रोड्स पर ही है।
आर्थिक और स्वास्थ्य पर असर
ट्रैफिक जाम से अर्थव्यवस्था को बड़ा नुकसान हो रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, इन शहरों में सालाना ईंधन की बर्बादी करोड़ों रुपये की है। बेंगलुरु में अकेले 168 घंटे की बर्बादी से प्रोडक्टिविटी लॉस करीब 10,000 करोड़ रुपये अनुमानित है। पुणे में इंडस्ट्रियल सेक्टर प्रभावित हो रहा है, जहां वर्कर्स लेट पहुंचते हैं, जिससे मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स का आउटपुट कम होता है।
स्वास्थ्य की बात करें तो जाम में फंसने से स्ट्रेस लेवल बढ़ता है, जो हार्ट डिजीज और मेंटल हेल्थ इश्यूज का कारण बन रहा है। कोलकाता में 150 घंटे जाम से एयर पॉल्यूशन एक्सपोजर बढ़ा है, जहां PM2.5 लेवल सामान्य से 20% ज्यादा रहता है। हैदराबाद और चेन्नई में ट्रैफिक से जुड़ी दुर्घटनाएं सालाना 5,000 से ज्यादा हैं, जो सड़क सुरक्षा को चुनौती दे रही हैं।
शहरवार विश्लेषण
बेंगलुरु: यहां कंजेशन सबसे ज्यादा है, क्योंकि सिलिकॉन वैली ऑफ इंडिया में आईटी प्रोफेशनल्स की संख्या 20 लाख से ऊपर है। औसत स्पीड 16.6 किमी/घंटा होने से रश ऑवर में 10 किमी का सफर 30 मिनट से ज्यादा लेता है।
पुणे: ऑटोमोबाइल हब होने से वाहनों की ग्रोथ 15% सालाना है। 152 घंटे जाम से लोकल बिजनेस प्रभावित, खासकर हिंजेवाड़ी आईटी पार्क एरिया में।
मुंबई: यहां हाईवे ट्रिप रेशियो 27.3% है, लेकिन सी लिंक और ईस्टर्न फ्रीवे पर भी जाम लगता है। 126 घंटे की बर्बादी से फिल्म इंडस्ट्री और फाइनेंशियल सेक्टर को नुकसान।
नई दिल्ली: कैपिटल में 104 घंटे जाम से गवर्नमेंट ऑफिसेस और डिप्लोमैटिक एरियाज प्रभावित। मेट्रो एक्सपैंशन से कुछ राहत, लेकिन रिंग रोड पर समस्या बरकरार।
कोलकाता: 150 घंटे जाम के साथ औसत स्पीड 17 किमी/घंटा। हावड़ा ब्रिज और ईस्टर्न मेट्रोपॉलिटन बाईपास पर रोजाना घंटों की देरी।
जयपुर: टूरिज्म से ट्रैफिक बढ़ा, 121 घंटे जाम में। आमेर रोड और जेएलएन मार्ग सबसे प्रभावित।
चेन्नई: 132 घंटे जाम से आईटी कॉरिडोर ओएमआर पर समस्या। मॉनसून में बाढ़ से स्थिति और खराब।
हैदराबाद: 123 घंटे जाम के साथ हाइटेक सिटी एरिया सबसे व्यस्त। साइबर टावर्स के आसपास ट्रैफिक मैनेजमेंट की कमी।
एर्नाकुलम: केरल के इस शहर में 118 घंटे जाम, जहां पोर्ट और कमर्शियल एक्टिविटी से ट्रक ट्रैफिक बढ़ा।
अहमदाबाद: 106 घंटे जाम के साथ इंडस्ट्रियल जोन्स जैसे साणंद में समस्या। BRTS सिस्टम से कुछ सुधार, लेकिन पर्याप्त नहीं।
सुधार के उपाय
सरकारें इन शहरों में मेट्रो, BRTS और फ्लाईओवर प्रोजेक्ट्स पर फोकस कर रही हैं। बेंगलुरु में BBMP ने सिग्नल ऑप्टिमाइजेशन के लिए AI टूल्स अपनाए हैं, जिससे 10% सुधार हुआ है। पुणे में PMPML बस सर्विस को मजबूत करने की योजना है। मुंबई में कोस्टल रोड प्रोजेक्ट से 20% ट्रैफिक रिडक्शन की उम्मीद। नई दिल्ली में EV पॉलिसी से इलेक्ट्रिक व्हीकल्स को बढ़ावा, जो प्रदूषण और जाम दोनों कम करेगी। कोलकाता में ईस्ट-वेस्ट मेट्रो से राहत मिल रही है। जयपुर में स्मार्ट सिटी इनिशिएटिव्स के तहत CCTV बेस्ड ट्रैफिक मॉनिटरिंग। चेन्नई में CMRL मेट्रो फेज 2 से 30% ट्रैफिक शिफ्ट। हैदराबाद में ORR पर टोल सिस्टम से फ्लो बेहतर। एर्नाकुलम में वाटर मेट्रो से वैकल्पिक ट्रांसपोर्ट। अहमदाबाद में AMTS बस नेटवर्क एक्सपैंशन से सुधार।
ये कदम अगर सही से लागू हुए तो कंजेशन 15-20% कम हो सकता है, लेकिन पब्लिक ट्रांसपोर्ट के इस्तेमाल को बढ़ावा देना जरूरी है।
Disclaimer: यह समाचार रिपोर्ट विभिन्न सूत्रों पर आधारित है और सूचनात्मक उद्देश्यों के लिए है।