“8वें वेतन आयोग की प्रक्रिया तेज हो गई है। इंडियन रेलवे टेक्निकल सुपरवाइजर्स एसोसिएशन (IRTSA) ने आयोग को पत्र लिखकर 9 प्रमुख मांगें रखी हैं, जिनमें कर्मचारी वर्गीकरण की समीक्षा, अतिरिक्त भत्तों का समावेश, पेंशन और फैमिली पेंशन के मुद्दों को शामिल करना प्रमुख है। सुझाव जमा करने की अंतिम तिथि 31 मार्च 2026 तक बढ़ा दी गई है, जबकि कर्मचारी संगठन फिटमेंट फैक्टर 3.0-3.25, न्यूनतम वेतन 54,000 रुपये और 7% वार्षिक वृद्धि की मांग कर रहे हैं।”
8th Pay Commission: सैलरी-पेंशन और भत्तों पर बड़ा अपडेट, रेलवे संगठन ने उठा दी 9 नई मांगें; क्यों उठाया कदम?
8वें केंद्रीय वेतन आयोग की कंसल्टेशन प्रक्रिया में रेलवे से जुड़े संगठनों की सक्रियता बढ़ गई है। इंडियन रेलवे टेक्निकल सुपरवाइजर्स एसोसिएशन (IRTSA) ने आयोग की चेयरपर्सन रंजना प्रकाश देसाई को पत्र लिखकर 18 सवालों वाली प्रश्नावली में बड़े बदलाव की मांग की है। संगठन का कहना है कि मौजूदा फॉर्मेट कर्मचारियों और पेंशनर्स के कई महत्वपूर्ण मुद्दों को कवर नहीं करता।
IRTSA ने कुल 9 नई मांगें उठाई हैं, जो मुख्य रूप से रेलवे के तकनीकी सुपरवाइजर्स, जूनियर इंजीनियर्स और आईटी स्टाफ से जुड़ी हैं। ये मांगें इस प्रकार हैं:
कर्मचारी वर्गीकरण (ग्रुप A, B, C) की पूरी समीक्षा – बदलती तकनीक, जिम्मेदारियों और कार्य प्रकृति को ध्यान में रखते हुए पुराने ढांचे में बदलाव।
अतिरिक्त भत्तों (Allowances) का विस्तार और समावेश – विशेष रूप से रेलवे से जुड़े जोखिम, तकनीकी और ओवरटाइम भत्तों को मजबूत करना।
पेंशन और फैमिली पेंशन से जुड़े सवालों को प्रश्नावली में स्पष्ट शामिल करना।
पदोन्नति नीति में सुधार – MACP स्कीम के अलावा अलग से करियर ग्रोथ के अवसर, खासकर तकनीकी पदों पर।
ऑफलाइन सुझाव जमा करने की अनुमति – ऑनलाइन पोर्टल के अलावा पारंपरिक तरीके से मेमोरेंडम भेजने का विकल्प।
प्रश्नावली में मौजूदा 9 थीम्स की संख्या बढ़ाना और प्रत्येक थीम के लिए 3500 कैरेक्टर की सीमा हटाना या बढ़ाना।
रेलवे के तकनीकी पदों (जैसे JE, SSE) की अलग सुनवाई – सामान्य कैटेगरी में न डालकर विशेष विचार।
न्यूनतम वेतन निर्धारण में फैमिली यूनिट को 3 से बढ़ाकर 5 करने पर विचार – जिसमें माता-पिता को भी शामिल किया जाए।
इंटरिम रिलीफ के रूप में 50% DA को बेसिक पे में मर्ज करने की सिफारिश।
ये मांगें इसलिए महत्वपूर्ण हैं क्योंकि रेलवे में लाखों कर्मचारी तकनीकी बदलावों से प्रभावित हैं। संगठन का तर्क है कि 7वें वेतन आयोग के बाद 10 साल में महंगाई, मेडिकल खर्च और आवास समस्या बढ़ गई है, इसलिए 8वें आयोग को इन मुद्दों को प्राथमिकता देनी चाहिए।
वर्तमान स्थिति में 8वां वेतन आयोग नवंबर 2025 में गठित हुआ था और इसकी सिफारिशें 18 महीने में आने की उम्मीद है। हालांकि, कर्मचारी संगठन 1 जनवरी 2026 से लागू करने की मांग पर अड़े हैं। NC-JCM (स्टाफ साइड) की बैठक में फिटमेंट फैक्टर 3.0 से 3.25 तक, वार्षिक इंक्रीमेंट 3% से बढ़ाकर 7%, और न्यूनतम बेसिक पे 46,000 से 54,000 रुपये तक करने की चर्चा हुई। कुछ संगठन तो 76,360 रुपये तक न्यूनतम वेतन की मांग कर रहे हैं यदि फैमिली यूनिट बढ़ाई जाए।
रेलवे कर्मचारियों के लिए विशेष चिंता OPS (पुरानी पेंशन स्कीम) की बहाली, HRA में वृद्धि और TA जैसे भत्तों का 1 जनवरी 2026 से लागू होना है। यदि सिफारिशें देर से आईं तो arrears के साथ भुगतान होगा, लेकिन कर्मचारी संगठन इंटरिम रिलीफ की मांग तेज कर रहे हैं।
आयोग ने सुझाव जमा करने की तिथि पहले 16 मार्च से बढ़ाकर 31 मार्च 2026 कर दी है। MyGov पोर्टल पर ऑनलाइन फीडबैक लिया जा रहा है, लेकिन IRTSA जैसे संगठन ऑफलाइन विकल्प की मांग कर रहे हैं ताकि विस्तृत मेमोरेंडम भेजा जा सके।
ये कदम दर्शाते हैं कि 8वें वेतन आयोग में रेलवे सेक्टर की आवाज मजबूत हो रही है। लाखों कर्मचारियों और पेंशनर्स के लिए सैलरी, पेंशन और भत्तों में संभावित बड़ा उछाल अब इन मांगों पर निर्भर करेगा।
Disclaimer: यह खबर विभिन्न कर्मचारी संगठनों की मांगों और आधिकारिक अपडेट्स पर आधारित है। अंतिम सिफारिशें आयोग की रिपोर्ट पर निर्भर करेंगी।