धनिया के दाम पिछले एक साल में 43% से अधिक चढ़कर ऑलटाइम हाई पर पहुंच गए हैं। NCDEX पर 2 फरवरी 2026 को कीमत 12,054 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंची, जबकि पिछले साल यही स्तर 6,780 रुपये का था। कम बुवाई, मौसम का खतरा और मजबूत निर्यात मांग इनकी तीन मुख्य वजहें हैं। गुजरात और राजस्थान जैसे प्रमुख उत्पादक राज्यों में सबसे ज्यादा प्रभाव पड़ रहा है, जहां फसल को नुकसान की आशंका से घरेलू बाजार में महंगाई बढ़ गई है।
धनिया कीमतों में भारी उछाल, घरेलू रसोई से लेकर निर्यात तक असर
धनिया, जो भारतीय रसोई का अभिन्न हिस्सा है, अब सोने-चांदी से भी तेजी से महंगा हो रहा है। पिछले 12 महीनों में इसकी कीमतों में 43% से अधिक की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। NCDEX पर धनिया फ्यूचर्स की कीमत 2 फरवरी 2026 को 12,054 रुपये प्रति क्विंटल पर पहुंच गई, जो इसका अब तक का सबसे ऊंचा स्तर है। 52-सप्ताह का निचला स्तर 6,780 रुपये प्रति क्विंटल रहा, यानी एक साल में 5,274 रुपये का उछाल आया है। पिछले एक महीने में ही कीमतें 10% तक चढ़ चुकी हैं।
यह तेजी सिर्फ वायदा बाजार तक सीमित नहीं है। मंडियों में भी आवक कम होने से थोक भाव मजबूत बने हुए हैं। उपभोक्ताओं के लिए धनिया पाउडर और बीज दोनों की कीमतें बढ़ने से मासिक खर्च पर असर पड़ रहा है। एक किलो धनिया बीज की औसत कीमत अब 90-120 रुपये के बीच पहुंच गई है, जबकि पिछले साल यह स्तर 60-80 रुपये था।
तीन मुख्य वजहें जो धनिया को महंगा बना रही हैं
कम बुवाई और उत्पादन में गिरावट की आशंका प्रमुख उत्पादक राज्य गुजरात में इस सीजन धनिया की बुवाई 3.78% घटकर मात्र 1,25,510 हेक्टेयर रह गई है। यह कमी सीधे सप्लाई चेन पर असर डाल रही है। अन्य राज्यों में भी रकवा सामान्य से कम है, जिससे कुल उत्पादन घटने का अनुमान है। कम स्टॉक और सीमित आवक से बाजार में माल की कमी बनी हुई है।
मौसम का बढ़ता खतरा फसल पर पाला (फ्रॉस्ट), पाउडरी मिल्ड्यू बीमारी और अचानक तापमान गिरने से कई समस्याएं उत्पन्न हो रही हैं। फूल आने के समय ठंड बढ़ने से फूल झड़ना, परागण प्रभावित होना और दाने छोटे रह जाना आम हो गया है। राजस्थान के जयपुर, अजमेर, दौसा और टोंक जिलों में यह खतरा सबसे ज्यादा है। अगर मौसम का मिजाज नहीं सुधरा तो पैदावार में 10-15% तक की कमी आ सकती है। किसान ठंड से बचाव के लिए स्प्रे और अन्य उपाय कर रहे हैं, लेकिन पूरी तरह जोखिम टल नहीं पाया है।
मजबूत निर्यात मांग अप्रैल से नवंबर 2025 तक धनिया के निर्यात में सालाना आधार पर 15% की बढ़ोतरी हुई है। नवंबर महीने में तो मासिक और सालाना दोनों स्तर पर तेज उछाल दर्ज किया गया। अंतरराष्ट्रीय बाजार में मांग मजबूत बनी हुई है, जिससे घरेलू स्टॉक पर दबाव बढ़ा है। निर्यातकों की सक्रियता से थोक व्यापारी भी ऊंचे दाम पर खरीदारी कर रहे हैं।
प्रमुख राज्यों पर असर
गुजरात : सबसे ज्यादा प्रभावित राज्य। बुवाई में कमी और सप्लाई चिंता से यहां मंडियों में भाव सबसे ऊंचे हैं। उत्पादन गिरावट का सीधा असर घरेलू बाजार पर पड़ रहा है।
राजस्थान : पाला और बीमारी का खतरा सबसे ज्यादा। जयपुर, अजमेर जैसे जिलों में फसल को नुकसान की आशंका से किसान चिंतित हैं। यहां आवक पहले से ही कम है।
मध्य प्रदेश : कुछ क्षेत्रों में अच्छी फसल है, लेकिन कुल मिलाकर उत्पादन सामान्य से कम रहने की संभावना है।
कीमतों का तुलनात्मक आंकड़ा (प्रति क्विंटल, NCDEX आधारित)
| अवधि | कीमत (रुपये) | बदलाव (%) |
|---|---|---|
| ऑलटाइम हाई (2 फरवरी 2026) | 12,054 | – |
| 52-सप्ताह लो | 6,780 | – |
| पिछले 12 महीने में वृद्धि | +5,274 | +43% |
| पिछले 1 महीने में वृद्धि | – | +10% |
यह तेजी जारी रहने की संभावना है, अगर मौसम का जोखिम बना रहा और निर्यात मांग कम नहीं हुई। उपभोक्ता अब धनिया खरीदते समय पहले से ज्यादा सतर्क हैं, जबकि किसानों को ऊंचे दाम मिलने से कुछ राहत मिल रही है।
डिस्क्लेमर यह समाचार रिपोर्ट विभिन्न बाजार स्रोतों और विशेषज्ञ राय पर आधारित है। इसमें दी गई जानकारी केवल सूचनात्मक है और निवेश या व्यापारिक निर्णय के लिए नहीं। बाजार में उतार-चढ़ाव सामान्य है, विशेषज्ञ सलाह जरूरी।