“20वीं सदी में भारत की सड़कों पर राज करने वाली ये क्लासिक कारें – Hindustan Ambassador, Premier Padmini, Fiat से प्रेरित मॉडल्स और Hindustan Contessa – न सिर्फ ट्रांसपोर्ट का साधन थीं, बल्कि स्टेटस, आराम और मजबूती का प्रतीक बनीं। Ambassador ने 57 साल तक प्रोडक्शन जारी रखा, Padmini ने मुंबई की टैक्सी इंडस्ट्री को बदला, जबकि Contessa ने लग्जरी का स्वाद दिया, लेकिन आर्थिक उदारीकरण और नई टेक्नोलॉजी ने इन्हें इतिहास बना दिया।”
20वीं सदी के भारत की वो बेहतरीन कारें, जिनके पीछे दीवाने थे लोग: Fiat से लेकर Contessa तक कब हुईं बंद
भारत में स्वतंत्रता के बाद ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री ने धीरे-धीरे जड़ें जमाईं। 1950-60 के दशक में लाइसेंस परमिट राज के कारण कुछ ही कंपनियां कार बना पाईं। इनमें Hindustan Motors और Premier Automobiles सबसे प्रमुख रहीं। लोग सालों इंतजार करते थे कार खरीदने के लिए, क्योंकि सप्लाई कम और डिमांड बहुत ज्यादा थी।
Hindustan Ambassador – भारत की सड़कों का बादशाह 1957 में लॉन्च हुई Hindustan Ambassador Morris Oxford Series III पर आधारित थी। ये कार अपनी मजबूती, स्पेसियस इंटीरियर और रफ रोड्स पर चलने की क्षमता के लिए मशहूर हुई। सरकारी अफसरों की पहली पसंद, लाल बत्ती वाली गाड़ी और कोलकाता की येलो टैक्सी – Ambassador हर जगह नजर आती थी। 1.5 लीटर BMC इंजन से शुरू होकर बाद में 1.8 लीटर और डीजल वेरिएंट्स आए। 1980 के दशक तक ये भारतीय कार मार्केट का दो-तिहाई हिस्सा कंट्रोल करती थी। लेकिन 1990 के बाद Maruti जैसे फ्यूल एफिशिएंट मॉडल्स आए तो डिमांड घटी। आखिरकार मई 2014 में Hindustan Motors ने प्रोडक्शन रोक दिया। कुल 57 साल चली ये कार आज भी क्लासिक कार कलेक्टर्स के बीच सबसे वैल्यूएबल है।
Premier Padmini – मुंबई की जान, Fiat की देन 1964 में लॉन्च हुई Premier Padmini असल में Fiat 1100 Delight थी, जिसे बाद में 1974 में Padmini नाम दिया गया। Fiat 1100D पर आधारित ये कॉम्पैक्ट सेडान शहरों में खासतौर पर पॉपुलर हुई। मुंबई की ब्लैक-येलो टैक्सियों में इसका बोलबाला था। 1.1 लीटर इंजन, 60 bhp पावर और 12-14 kmpl माइलेज के साथ ये फैमिली और टैक्सी दोनों के लिए परफेक्ट थी। 1970-80 के दशक में वेटिंग पीरियड 4-5 साल तक पहुंच गया। लेकिन 1991 के आर्थिक उदारीकरण के बाद नई कारों ने मार्केट छीन लिया। Premier Automobiles ने 2001 में इसका प्रोडक्शन बंद कर दिया। कुल लगभग 37 साल चली Padmini ने लाखों भारतीयों को पहली कार का सपना पूरा किया।
Fiat से प्रेरित Premier 118NE – मॉडर्न टच वाली Fiat 1985 में Premier ने Fiat 124 पर आधारित Premier 118NE लॉन्च किया। ये कार Padmini से ज्यादा मॉडर्न थी – बेहतर हैंडलिंग, 1.8 लीटर इंजन (बाद में Isuzu टेक के साथ) और 5-स्पीड गियरबॉक्स। ये मिड-साइज सेडान थी जो थोड़ी लग्जरी फील देती थी। लेकिन हाई प्राइस और लंबी डिलीवरी टाइम (कभी-कभी 2 साल) की वजह से ये उतनी पॉपुलर नहीं हो पाई। Premier ने इसे Viceroy नाम से भी बेचा। 2001 तक प्रोडक्शन चला, लेकिन Padmini की तरह ये भी मारुति और अन्य ग्लोबल ब्रांड्स से कॉम्पिटिशन नहीं कर पाई। Fiat का भारतीय अवतार यहीं खत्म हुआ।
Hindustan Contessa – भारत की अपनी मसल कार 1984 में लॉन्च हुई Hindustan Contessa Vauxhall VX Series (1976-78) पर आधारित थी। Ambassador से ज्यादा लग्जरी वाली ये कार वाइड सीट्स, सॉफ्ट राइड और प्रीमियम फील के लिए जानी गई। शुरू में 1.5 लीटर BMC इंजन था, लेकिन बाद में Isuzu 1.8 लीटर पेट्रोल, 2.0 लीटर डीजल और टर्बोडीजल वेरिएंट्स आए। सरकारी अफसरों और बिजनेसमैन की फेवरेट बनी। 140 km/h टॉप स्पीड और स्पेसियस केबिन ने इसे अलग बनाया। लेकिन 1990 के अंत में पेट्रोल प्राइस बढ़ने और फ्यूल एफिशिएंट कारों के आने से डिमांड घटी। Hindustan Motors ने 2002 में इसका प्रोडक्शन बंद कर दिया। कुल 18 साल चली Contessa आज क्लासिक कार लवर्स के लिए रेयर पीस है।
ये कारें क्यों बंद हुईं – मुख्य कारण
1991 के आर्थिक उदारीकरण ने विदेशी कंपनियां जैसे Maruti Suzuki, Hyundai, Ford भारत में लाईं।
फ्यूल एफिशिएंसी, मॉडर्न फीचर्स और कम मेंटेनेंस वाली नई कारों ने पुरानी टेक्नोलॉजी को पीछे छोड़ दिया।
Ambassador और Contessa जैसी कारें थर्स्टी थीं, जबकि नई कारें 15-20 kmpl देती थीं।
प्रोडक्शन कॉस्ट बढ़ा, लेबर इश्यूज और कम डिमांड ने फैक्टरियां बंद करवाईं।
आज ये कारें सड़कों पर कम दिखती हैं, लेकिन विन्टेज कार रैलियों, बॉलीवुड फिल्मों और कलेक्टर्स के गैरेज में जिंदा हैं। ये 20वीं सदी के भारत की कहानी कहती हैं – जब कार सिर्फ चलने का साधन नहीं, बल्कि गर्व और पहचान थी।