ये है दुनिया के 10 सबसे ज्यादा ट्रैफिक वाले शहर, दूसरे स्थान पर देश का ये शहर

“TomTom Traffic Index 2025 के अनुसार, दुनिया में सबसे ज्यादा ट्रैफिक कंजेशन वाले शहरों में मैक्सिको सिटी पहले स्थान पर है, जबकि भारत का बेंगलुरु दूसरे स्थान पर। लिस्ट में पुणे भी पांचवें स्थान पर है। इन शहरों में औसत स्पीड 16-27 km/h के बीच है, और ड्राइवर सालाना 115-195 घंटे ट्रैफिक में बर्बाद करते हैं। इससे अर्थव्यवस्था, स्वास्थ्य और पर्यावरण पर गंभीर प्रभाव पड़ता है।”

TomTom Traffic Index 2025 की रिपोर्ट से पता चलता है कि वैश्विक स्तर पर ट्रैफिक कंजेशन एक बड़ी समस्या बन चुकी है। इस इंडेक्स में कंजेशन लेवल को प्रतिशत में मापा जाता है, जो यह दर्शाता है कि फ्री-फ्लो ट्रैफिक की तुलना में कितना अतिरिक्त समय लगता है। रिपोर्ट में 501 शहरों का विश्लेषण किया गया, जहां औसत यात्रा समय, स्पीड और सालाना खोए हुए घंटों को ध्यान में रखा गया। सबसे ज्यादा प्रभावित शहरों में विकासशील देशों के महानगर प्रमुख हैं, जहां रोड इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी, वाहनों की बढ़ती संख्या और शहरीकरण तेज है।

नीचे दी गई टेबल में दुनिया के टॉप 10 सबसे कंजेस्टेड शहरों की सूची है, जिसमें उनका रैंक, कंजेशन लेवल, औसत स्पीड, 15 मिनट में तय की जा सकने वाली दूरी और सालाना ट्रैफिक में खोए हुए घंटे शामिल हैं:

रैंकशहर, देशकंजेशन लेवल (%)औसत स्पीड (km/h)15 मिनट में दूरी (km)सालाना खोए घंटे
1मैक्सिको सिटी, मैक्सिको75.917.44.4184
2बेंगलुरु, भारत74.416.64.2168
3डबलिन, आयरलैंड72.917.44.4191
4लॉड्ज़, पोलैंड72.822.55.6135
5पुणे, भारत71.1184.5152
6लुब्लिन, पोलैंड70.4276.8117
7बोगोटा, कोलंबिया69.618.94.7153
8अरेक्विपा, पेरू69.5184.5154
9लीमा, पेरू69.317.24.3195
10बैंकॉक, थाईलैंड67.926.16.5115

इस लिस्ट से साफ है कि भारत के दो शहर – बेंगलुरु और पुणे – टॉप 5 में शामिल हैं। बेंगलुरु में कंजेशन लेवल 74.4% है, जिसका मतलब है कि यहां की यात्राएं सामान्य से 74% ज्यादा समय लेती हैं। औसत स्पीड सिर्फ 16.6 km/h है, जो पैदल चलने की स्पीड से थोड़ी ही ज्यादा है। एक सामान्य ड्राइवर यहां सालाना 168 घंटे ट्रैफिक में फंसकर बर्बाद करता है, जो लगभग 7 दिनों के बराबर है।

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ट्रैफिक कंजेशन के प्रमुख कारणों में शामिल हैं:

वाहनों की बढ़ती संख्या : भारत में EV और पर्सनल कारों की बिक्री में 2025 में 25% की वृद्धि दर्ज की गई, लेकिन रोड नेटवर्क का विस्तार सिर्फ 10% हुआ।

शहरीकरण और माइग्रेशन : बेंगलुरु जैसे शहरों में IT हब होने से लाखों लोग रोजाना आते-जाते हैं, जिससे पीक ऑवर्स में रोड पर दबाव बढ़ता है।

इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी : फ्लाईओवर, मेट्रो और रिंग रोड प्रोजेक्ट्स में देरी, जैसे बेंगलुरु के BBMP प्रोजेक्ट्स में 2025 तक सिर्फ 60% पूरा होना।

मौसम और निर्माण कार्य : मानसून में पानी भरना और लगातार डिगिंग से स्थिति और खराब हो जाती है।

पब्लिक ट्रांसपोर्ट की अपर्याप्तता : BMTC बसों की संख्या जरूरत से 30% कम है, जिससे लोग प्राइवेट वाहनों पर निर्भर हैं।

आर्थिक प्रभाव की बात करें तो, इन शहरों में ट्रैफिक से सालाना अरबों रुपये का नुकसान होता है। उदाहरण के लिए, बेंगलुरु में ट्रैफिक कंजेशन से 2025 में अनुमानित 50,000 करोड़ रुपये का उत्पादकता नुकसान हुआ, जो GDP के 2% के बराबर है। ईंधन की बर्बादी बढ़ती है – औसतन एक ड्राइवर 20% ज्यादा पेट्रोल या डीजल खर्च करता है। इससे प्रदूषण स्तर भी बढ़ता है; बेंगलुरु में PM2.5 लेवल ट्रैफिक से 40% योगदान पाता है, जो स्वास्थ्य जोखिम जैसे अस्थमा और हृदय रोग बढ़ाता है।

पुणे की स्थिति भी चिंताजनक है, जहां कंजेशन लेवल 71.1% है। यहां औसत स्पीड 18 km/h है, और ड्राइवर सालाना 152 घंटे खोते हैं। पुणे में ऑटोमोबाइल हब होने से ट्रकों और कमर्शियल वाहनों की संख्या ज्यादा है, जो रोड को ब्लॉक करती है। हाल ही में पुणे मेट्रो के फेज 2 में देरी से समस्या और बढ़ी है।

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वैश्विक तुलना में, मैक्सिको सिटी में कंजेशन सबसे ज्यादा है, जहां 184 घंटे सालाना खोए जाते हैं। यहां की घनी आबादी और पुरानी रोड सिस्टम मुख्य वजह है। वहीं, यूरोपीय शहर जैसे डबलिन और लॉड्ज़ में सर्दियों में बर्फबारी और पर्यटन से ट्रैफिक बढ़ता है। दक्षिण अमेरिकी शहरों जैसे बोगोटा और लीमा में पब्लिक ट्रांसपोर्ट की कमी और अनियोजित शहरी विकास समस्या पैदा करता है।

ट्रैफिक कम करने के लिए कुछ प्रभावी उपाय:

स्मार्ट सिटी इनिशिएटिव : भारत सरकार के स्मार्ट सिटी मिशन के तहत AI-बेस्ड ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम, जैसे बेंगलुरु में ITS (Intelligent Transport System) का विस्तार।

EV प्रमोशन : FAME-III स्कीम से EV चार्जिंग स्टेशन बढ़ाना, जो ट्रैफिक फ्लो सुधार सकता है।

कारपूलिंग ऐप्स : Ola, Uber जैसे प्लेटफॉर्म्स पर कारपूलिंग को बढ़ावा, जिससे वाहनों की संख्या 15% कम हो सकती है।

वर्क फ्रॉम होम पॉलिसी : IT कंपनियों में हाइब्रिड मॉडल से पीक ऑवर्स में 20% ट्रैफिक कम।

इंफ्रास्ट्रक्चर अपग्रेड : NHAI के तहत हाईवे विस्तार, जैसे बेंगलुरु-मैसूर एक्सप्रेसवे का पूरा होना।

इन शहरों में ट्रैफिक का स्वास्थ्य पर असर गंभीर है। WHO के अनुसार, ट्रैफिक प्रदूषण से सालाना 7 मिलियन मौतें होती हैं, जिसमें भारत का योगदान 1.2 मिलियन है। बेंगलुरु में स्ट्रेस लेवल ट्रैफिक से 30% बढ़ता है, जो मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित करता है।

रिपोर्ट से यह भी पता चलता है कि विकासशील देशों में ट्रैफिक कंजेशन 2025 में 15% बढ़ा है, जबकि विकसित देशों में रिमोट वर्क से 5% कमी आई। भारत में, दिल्ली और मुंबई जैसे अन्य शहर भी टॉप 50 में हैं, लेकिन बेंगलुरु और पुणे सबसे ऊपर हैं। सरकार द्वारा EV पॉलिसी और मेट्रो एक्सपैंशन से 2030 तक 20% सुधार की उम्मीद है।

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ट्रैफिक मैनेजमेंट के लिए डेटा एनालिटिक्स का इस्तेमाल बढ़ रहा है। उदाहरण के लिए, Google Maps और Waze जैसे ऐप्स रीयल-टाइम डेटा से रूट ऑप्टिमाइजेशन करते हैं, जो व्यक्तिगत स्तर पर 10-15% समय बचा सकता है। शहर प्रशासन को CCTV और IoT सेंसर से ट्रैफिक पैटर्न एनालाइज करने चाहिए।

अंत में, ये आंकड़े दर्शाते हैं कि ट्रैफिक कंजेशन सिर्फ समय की बर्बादी नहीं, बल्कि आर्थिक, पर्यावरणीय और सामाजिक चुनौती है। नीतिगत बदलाव और नागरिक जागरूकता से ही समाधान संभव है।

Disclaimer: यह न्यूज रिपोर्ट विभिन्न रिपोर्ट्स और डेटा पर आधारित है। टिप्स सामान्य सलाह हैं और पेशेवर सलाह की जगह नहीं लेते।

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